बांका। लक्ष्मीपुर रानी महकम की तालाब उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। कभी जयपुर क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए वरदान साबित होता था। यह तालाब कभी सूखती नहीं है। चार एकड़ में फैले तालाब के चारों कोने में भव्य मंदिर और बीच तालाब में बने नवरत्न महल तक राजमहल से रानी के लिए जाने का रास्ता अब भी इस तालाब की भव्यता को बयां कर रहा है। इसके अलावा चारों तरफ सरीनुमा ईट से बना तटबंध अब भी तालाब की सुरक्षा कवच बनी हुई है। मत्स्य पालन के मामले में यह तालाब सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

संरक्षण के अभाव में राजतंत्र जमाने का यह धरोहर धीरे-धीरे धराशाई होता जा रहा है। रानी महकम की इच्छा से बने इस तालाब के निर्माण में वास्तु शास्त्र का भी ख्याल रखा गया था। अपने दाई से लेकर सेना एवं आम जनता के स्नान के लिए तालाब में अलग-अलग घाट निर्धारित किए गए थे। स्नान के बाद पूजा अर्चना के ख्याल से तालाब के चारों कोने में मंदिर भी बनवाया गया था।

शक्ति पीठ के नाम से विख्यात काली मंदिर की ख्याति बिहार झारखंड उड़ीसा सहित बंगाल तक फैली है। यहां आने वाले हर पर्यटक इस तालाब में डुबकी लगाकर शक्तिपीठ काली मंदिर में पूजा याचना करते थे। मगर संरक्षण के अभाव में यह तालाब अब प्रयोग लायक नहीं रही। तालाब के चारों तरफ बने मंदिर एवं बीच तालाब में बना पंचरत्न महल का अब सिर्फ ढांचा खड़ा है। अब ये सिर्फ मछली पालन के काम आता है। गाद भर जाने के कारण तालाब की वाटर स्टोरेज क्षमता भी कम हो गई है। ग्रामीण बताते हैं कि शक्तिपीठ काली मंदिर एवं दुर्गा पूजा आयोजन में होने वाले खर्च का वहन तालाब की मछली पालन से ही होता आ रहा था। मगर गाद भर जाने के कारण मछली पालन भी वृहत पैमाने पर नहीं हो पा रहा है।

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पर्यटन विभाग के सचिव ने दिया था जीर्णोद्धार का भरोसा :

पर्यटन स्थल को लेकर तत्कालीन डीडीसी प्रदीप कुमार के पहल पर एक बार मंदिरों के रंग रोगन के साथ तालाब के आसपास साफ सफाई का अभियान भी चलाया गया था। इसके बाद पिछले वर्ष जदयू नेता सह समाजसेवी ओंमकार यादव के साथ पर्यटन विभाग के सचिव ने चांदन डैम एवं लक्ष्मीपुर राजा के धरोहर का दीदार किया था। उन्होंने बताया था कि यहां भी पर्यटन के अपार संभावना है।

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जीर्णोद्धार से पर्यटन के साथ खेती को भी मिलेगा बढ़ावा :

मंदिर एवं तालाब का नजारा देखने के लिए जिलाधिकारी तक यहां पहुंच चुके हैं। मगर अब इसके जीर्णोद्धार की दरकार है तालाब के जीर्णोद्धार से ना सिर्फ मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सिचाई एवं पर्यटन के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होगा।

Posted By: Jagran

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