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बूटों की आहट से छा जाता था सन्नाटा, हर विषय पर थी जादुई पकड़! बांका के वे गुरु, जिनकी गाथाएं आज भी सुनाते हैं शिष्य

Published: Fri, 04 Sep 2026 02:58 PM (IST)

Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस पर बांका उन महान गुरुओं को याद कर रहा है जिन्होंने ज्ञान और संस्कारों से ...और पढ़ें

Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस पर बांका के महान गुरुओं की याद, नित्या बाबू का कड़ा अनुशासन और राष्ट्रपति पुरस्कृत सुबोध बाबू की विद्वता आज भी मिसाल

Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस पर बांका के महान गुरुओं की याद, नित्या बाबू का कड़ा अनुशासन और राष्ट्रपति पुरस्कृत सुबोध बाबू की विद्वता आज भी मिसाल

HighLights

  1. नित्या बाबू का अनुशासन आरएमके उच्च विद्यालय की पहचान था।

  2. सुबोध नारायण सिंह को शिक्षा में योगदान हेतु राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला।

  3. दशरथ यादव और शहजानंद शर्मा ने ग्रामीण अंचल में शिक्षा दी।

जागरण संवाददाता, बांका। Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस का मौका केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उस गुरु परंपरा को नमन करने का दिन है जिसने समाज की नींव को ज्ञान और संस्कारों से सींचा। बांका जिले की धरा पर ऐसे कई महान गुरु हुए, जिनकी भौतिक विदाई के वर्षों बाद भी उनकी कृतियां, आदर्श और ज्ञान की आभा लोकस्मृतियों में जीवित है।

जब भी जिले के शिक्षा जगत के स्वर्णिम दौर की चर्चा होती है, तो जुबान पर अनायास ही दो नाम आ जाते हैं- आरएमके उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक नित्यानंद सिंह उर्फ 'नित्या बाबू' और मोहनपुर उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक सुबोध नारायण सिंह। एक के अनुशासन का खौफ बच्चों को गढ़ता था, तो दूसरे की अगाध विद्वता ने राष्ट्रपति भवन तक जिले का मान बढ़ाया था।

वर्ष 1983 में सेवानिवृत्त हुए नित्या बाबू तीन-चार साल पूर्व इस नश्वर संसार को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन आरएमके स्कूल से पढ़कर निकले उनके हजारों शिष्य आज भी उनका नाम पूरे आदर और श्रद्धा से लेते हैं। उनके पुराने छात्र बताते हैं कि उनके कार्यकाल में अनुशासन ही विद्यालय की सबसे बड़ी ताकत थी। जब वे स्कूल की गैलरी में निरीक्षण के लिए निकलते थे, तो उनके बूटों की 'खट-खट' आवाज से पूरे विद्यालय परिसर में ऐसा सन्नाटा पसर जाता था कि सुई गिरने की आवाज भी सुनाई दे जाए।

  • शिक्षक दिवस विशेष: बांका के आरएमके और मोहनपुर स्कूल के ऐतिहासिक प्रधानाध्यापकों की आज भी मिसाल देते हैं उनके शिष्य

  • आरएमके स्कूल के पूर्व एचएम नित्यानंद सिंह (नित्या बाबू) का था ऐसा अनुशासन कि गैलरी में बूट की गूंज सुनते ही शांत हो जाते थे छात्र

  • मोहनपुर उच्च विद्यालय के पूर्व एचएम सुबोध नारायण सिंह को मिला था राष्ट्रपति पुरस्कार, हर विषय पर थी अद्भुत विद्वता

  • गोरगांवा मध्य विद्यालय के दशरथ यादव और शहजानंद शर्मा का भी क्षेत्र में मान, शिष्यों को अभिभावक बनकर तराशा

स्थानीय नागरिक रामकिशोर सिंह, शंकर झा और महेश चक्रवर्ती याद करते हैं कि आजादी से पूर्व स्थापित आरएमके स्कूल उस दौर में बांका का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान था। अमीर हो या गरीब, सबके बच्चे यहीं पढ़ते थे। नित्या बाबू के रहते किसी शिक्षक की मजाल नहीं थी कि कोई क्लास लेट हो या मिस हो जाए। पढ़ाई का स्तर अव्वल था और उनके कड़े अनुशासन का डंका चार-पांच दशक बाद भी शहर में गूंज रहा है।

राष्ट्रपति से सम्मानित सुबोध बाबू: हर विषय पर थी अचूक पकड़

वहीं, मोहनपुर उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक रहे सुबोध नारायण सिंह की पहचान एक ऐसे प्रकांड विद्वान शिक्षक के रूप में थी, जिनके ज्ञान का लोहा बड़े-बड़े शिक्षाविद मानते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से नवाजा गया था।

उनके शिष्य नागेश्वर साह गर्व से बताते हैं कि सुबोध बाबू सिर्फ एक विषय के शिक्षक नहीं थे; हिंदी और अंग्रेजी साहित्य से लेकर सामाजिक विज्ञान और कठिन वैज्ञानिक समीकरणों पर उनकी सूक्ष्म पकड़ देख हर कोई चकित रह जाता था। वे किसी भी विषय को इतनी सहजता से समझाते थे कि कमजोर से कमजोर छात्र भी उस विषय में पारंगत हो जाता था।

गोरगांवा के दशरथ बाबू और शहजानंद जी ने अभिभावक बनकर संवारा भविष्य

गुरु-शिष्य परंपरा की यह महक केवल जिला मुख्यालय तक ही सीमित नहीं रही। बेलहर प्रखंड के गोरगांवा मध्य विद्यालय के शिक्षक दशरथ प्रसाद यादव और शहजानंद शर्मा का योगदान भी ग्रामीण अंचल में अमर है।

स्थानीय विश्वनाथ साह और शंकर दास बताते हैं कि दो-तीन दशक बीत जाने के बाद भी इलाके में लोग उनकी अध्यापन शैली का गुणगान करते नहीं थकते। वे सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बांटते थे, बल्कि एक सच्चे अभिभावक की तरह आर्थिक रूप से कमजोर शिष्यों की अंगुली पकड़कर उन्हें जीवन की हर परीक्षा में आगे बढ़ाते थे। शिक्षक दिवस पर बांका इन सभी मनीषी गुरुओं के चरणों में अपनी कृतज्ञ श्रद्धांजलि अर्पित करता है।