'डीएम अंकल, पुलिया बनवा दीजिए', बांका के रजौन में 9 फीट गहरे डांड़ को पार कर स्कूल जाने को मजबूर मासूम
Banka School Kids Canal Crossing: बांका के रजौन में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय अमहारा एससी टोला के बच्चे बरसात में 9 ...और पढ़ें

Banka School Kids Canal Crossing: 'गोद में उठाकर डांड़ पार कराते हैं शिक्षक...' पानी में फिसलने का डर, फिर भी पढ़ने की जिद; बांका के नौनिहालों ने लगाई डीएम से गुहार
HighLights
बांका के रजौन में बच्चे गहरे डांड़ से स्कूल जाते हैं।
शिक्षक बच्चों को गोद में उठाकर डांड़ पार कराते हैं।
ग्रामीणों ने डीएम से पुलिया निर्माण की मांग की है।
संवाद सूत्र, रजौन (बांका)। Banka School Kids Canal Crossing: ‘डीएम अंकल, हमारे स्कूल के पास एक छोटी सी पुलिया बनवा दीजिए, ताकि हमें गंदे और गहरे पानी में उतरकर स्कूल न जाना पड़े...।’ बांका जिले के रजौन प्रखंड अंतर्गत हरचंडी अमहारा पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय (एनपीएस) अमहारा एससी टोला के नौनिहालों की यह मासूम मनुहार उस दर्दनाक जमीनी हकीकत को बयां करती है, जिसे वे हर साल बरसात के दिनों में अपनी जान हथेली पर रखकर झेलते हैं।
आजादी के अमृत काल में भी बुनियादी संपर्क पथ और एक अदद पुलिया के अभाव में यहां के मासूम बच्चों को रोजाना शिक्षा हासिल करने के लिए मौत के मुहाने से होकर गुजरना पड़ रहा है।
बांका के रजौन स्थित एनपीएस अमहारा एससी टोला के रास्ते में पड़ता है 7 से 10 फीट चौड़ा और 9 फीट गहरा डांड़
बरसात में जलभराव के चलते जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं प्राथमिक विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चे
शिक्षक सुबोध कुमार नन्हे-मुन्नों को गोद में उठाकर और हाथ पकड़कर कराते हैं पार, अनहोनी की आशंका से सहमे रहते हैं अभिभावक
विद्यालय द्वारा मिट्टी डालकर बनाया गया अस्थायी रास्ता बारिश में हुआ फिसलन भरा; ग्रामीणों ने डीएम अंशुल अग्रवाल से मांगी पक्की पुलिया
विद्यालय परिसर के ठीक पूरब दिशा में लगभग सात से 10 फीट चौड़ा और छह से नौ फीट गहरा प्राकृतिक डांड़ (नाला) स्थित है। मानसून के मौसम में आसपास के खेतों और जलस्रोतों का पानी भर जाने के कारण यह डांड़ लबालब भर जाता है। प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों के लिए इस गहरे और पानी से भरे डांड़ को पार करना किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता।
शिक्षक बनते हैं सहारा, गोद में उठाकर पार कराते हैं पानी
डांड़ में पानी का बहाव तेज होने और गहराई अधिक होने के कारण मासूमों के फिसलकर गहरे पानी में समा जाने का खतरा हर पल मंडराता रहता है। ऐसे विकट हालात में विद्यालय के शिक्षक सुबोध कुमार बच्चों के लिए जीवनदाता की भूमिका निभा रहे हैं। वे रोज स्कूल आने और छुट्टी के समय खुद पानी में उतरते हैं और छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं को कभी गोद में उठाकर तो कभी हाथ पकड़कर सुरक्षित डांड़ पार कराते हैं।
इसके बावजूद जब तक बच्चे सुरक्षित घर नहीं लौट आते, तब तक अभिभावकों की सांसें अटकी रहती हैं। बच्चों की इस दैनिक दुर्दशा को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने अपनी ओर से करीब सात से आठ फीट चौड़ाई में मिट्टी भरवाकर एक कामचलाऊ रास्ता बनाने की कोशिश की थी, लेकिन लगातार हो रही मानसूनी बारिश से वह मिट्टी बह गई है और समूचा मार्ग खतरनाक दलदल व फिसलन में तब्दील हो चुका है।
वर्षों से उठ रही मांग, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार
ग्रामीण मन्नू हरिजन, वार्ड सदस्य अरविंद दास, भूदेव मंडल, उदय हरिजन और जीपलाल मंडल का कहना है कि गांव के दलित टोले के बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लिए पुलिया और पक्की सड़क निर्माण की मांग वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक दफ्तरों में की जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला।
ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने बांका के जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल से मांग की है कि वे खुद स्थल का भौतिक निरीक्षण करें और संवेदनशीलता दिखाते हुए इस गहरे डांड़ पर अविलंब पुलिया निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति दें, ताकि मासूमों का भविष्य सुरक्षित हो सके और वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
