बिहार में तिलापिया मछली के पालन से बढ़ेगी किसानों की इनकम, कम समय-कम लागत में बंपर मुनाफा
बांका में मत्स्य विभाग किसानों को तिलापिया मछली पालन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, ...और पढ़ें

बिहार में मछली पालन। (AI Generated Image)

समय कम है?
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संवाद सूत्र, बांका। किसान आने वाले समय में पंगेशियस के साथ-साथ बड़े पैमाने पर तिलापिया मछली का पालने करेंगे। इसके लिए पहल शुरू कर दी गई है। मत्स्य विभाग की ओर से तिलापिया मछली के पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे किसानों की आमदनी बढ़े।
किसान साल में दो बार कल्चर कर सकते हैं। वैसे तो मछली की यह प्रजाति केरल में बेहतर मानी जाती है। इसकी पौष्टिकता और स्वाद को ध्यान में रखकर यहां के मत्स्यपालकों तक इसे पहुंचाने की योजना है। इसके लिए किसानों का चयन कर लिया गया है। जिन्हें विभाग की ओर से फ्री में बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला मत्स्य पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अब तक यहां पर रोहू, कतला, पंगेशियत सहित अन्य मछलियों का पालन किसान बड़े पैमाने पर करते आ रहे हैं। अब किसानों को तिलापिया मछली के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि साल में किसान एक तालाब में दो कल्चर कर सकते हैं। इसका ग्रोथ बहुत तेजी से होता है। चार से पांच महीने में यह आठ सौ ग्राम से लेकर एक किलो का हो जाता है। किसान कम लागत में बेहतर आमदनी में इससे प्राप्त कर सकते हैं।
17 हजार टन मछली का उत्पादन
बांका पूरी तरह मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है। यहां पर औसतन हर साल करीब 17 हजार टन मछली का उत्पादन हो रहा है। इसमें रेहू, कतला से लेकर पंगेशियस सहित अन्य मछलियां शामिल हैं। सबसे अधिक यहां पर पंगेशियस का पालन किसान करते हैं।
मछली पालन से वैसे तो पूरे जिला के किसान जुड़े हैं, लेकिन सबसे अधिक रजौन में नए तालाब का निर्माण कराए जा रहे हैं।
मत्स्य विभाग के आंकड़े के अनुसार, पूरे जिले में सरकारी तालाब 845 है, जबकि निजी तालाबों की संख्या पांच हजार से पार है। मछली पालन से युवाओं के लिए बेहतर स्वरोजगार का जरिया बनता जा रहा है।
तिलापिया मछली के पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा। - मनोज कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी
