बांका। दक्षिण भारतीय साहित्यकार आनंद शंकर माधवन की पुण्यतिथि गुरुवार को अद्वैत मिशन मंदार विद्यापीठ व शिवधाम में मनाई गई। वे केरल से आकर लंबी समय तक बौंसी के मंदार विद्यापीठ की स्थापना कर कई दशकों तक हिन्दी साहित्य की सेवा की है। संस्थान के सचिव अर¨वद मंडवथ ने आनंद शंकर माधवन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके पूर्व छात्रों ने कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मौके पर माधवन व पूर्व सचिव आदित्यनाथ की समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित किए गए। मौके पर संस्थान के सचिव अर¨वद मंडवथ ने माधवन को सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। कहा कि शिक्षा का अलख जगाते हुए लोगों की अंतरात्मा को जागृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि माधवनजी का सपना था कि मंदार क्षेत्र शिक्षा में पूरे भारत में एक समृद्ध उंचाई तक पहुंचे। विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि आनंद शंकर माधवन एक तपोनिष्ठ ग्रंथकार थे। जिन्होंने अनगिनत विधाओं में पुस्तकें लिखीं हैं। दक्षिण भारत में पले बढ़े माधवन ने अपना सम्पूर्ण जीवन फकीरी में गुजार दुनियां को अनमोल साहित्य रत्न दिए। प्राचार्य मोहन दासन ने कहा कि माधवन जी का जीवन कार्य इस क्षेत्र के लिए बड़ा प्रेरणाश्रोत है। वे कभी नहीं चाहते थे कि शिक्षा की प्रगति के रास्ते में धर्म या जाति को बाधक बने। मौके पर विजय कुमार, शोभा नायर, अश्विनी झा, मुरली झा, सपूत झा, त्रिभूूवन ¨सह, मनोज धोष, राणा ¨सह, ज्ञानू चौधरी, रामानुज ¨सह, सुरेश यादव आदि मौजूद थे।

-------------

माधवन एक परिचय

अद्वैत मिशन मंदार विद्यापीठ के संस्थापक सह साहित्य मनीषी आनंद शंकर माधवन का जन्म 10 मार्च 1914 को हुआ था। उनका निधन 14 फरवरी 2007 को हुआ था। आनंद शंकर माधवन यहां छह दशकों तक हिन्दी साहित्य की सेवा की। वे 1941 में संपूर्ण भारत की पदयात्रा में निकले और मंदार प्रवास के दौरान यहां आकर बस गए। उन्होंने 1945 में यहां मंदार विद्यापीठ की स्थापना की। लगभग 60 मानव ग्रंथों की रचना की है।

Posted By: Jagran