औरंगाबाद । मानसून ने दस्तक देना आरंभ किया है। बूंदा-बांदी बारिश हुई है। पिछले दिनों हुई बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है। बारिश के भय से ही लोग कांपने लगे हैं। फिर वहीं हालात, वही पुराने संसाधन, लेकिन जिम्मेदार विभाग का दावा कभी कम नहीं हुआ। हर बार शहर जलजमाव से जूझता रहा। कुछ ऐसी ही तस्वीर शहर के कई इलाकों की है, जहां वैकल्पिक उपाय नगर परिषद द्वारा उपयोग में नही लाये जा रहे हैं। मतलब इस बार भी शहर की गलियों और घरों में गंदा पानी नाले-नालियों से निकलकर घुसेगा, फिर शहर की आधी से अधिक आबादी जलजमाव से प्रभावित होगा। दो बार रिमीझीम बारिश के बाद शहर के अधिकांश मुहल्लों में बारिश का पानी सड़कों पर पसर गया, हालांकि वर्षा का अभी पूरा सीजन बाकी है। तीन माह तक चलने वाली बारिश शहरवासियों के लिए हर साल समस्याओं की सौगात लेकर आती हैं, शहर में कहीं भी पानी के निकासी का कोई माध्यम नहीं है। शहर के बजाजा रोड के हालात वर्षा से पहले ही नरक से दिखने लगे हैं। बरसात के मौसम में यहां शायद ही कोई निकलकर सड़क तक आ सके। वर्षा के दिनों में जलजमाव से गलियों का पानी ठेहुना तक भर जाता है। नालों का सड़क से ऊंचा होना प्रमुख वजह है। दलदल युक्त मिट्टी, कीचड़ से होकर लोगों को दुकानों एवं घरों तक जाना पड़ता है। बजाजा रोड में बारिश में घरों से निकलना दुश्वार हो जाता है। नजारा किसी तालाब से कम नहीं। बरसात में घुटने तक पानी सप्ताह भर जमा रहता है। राह चलना भी दुश्वार। छात्र छात्राएं को रास्ता बदलकर पढ़ाई हेतु जाना पड़ता है। बारिश होने पर भर जाता है पानी : अकबर

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दुकानदार अकबर हुसैन का कहना है कि बरसात में आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाती है, मात्र एक घंटा के बारिश में ही पानी भर जाता है कि उसे निकलने तीन दिन लग जाते हैं। दुकानदारी पूरी तरह ठप हो जाती है। चलना हो जाता है मुश्किल : चंदन

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चंदन कुमार का कहना है कि इस बाजार में दो बार सड़क बना पर नाली पहले बनना चाहिए था जो बाद में बना जिसके कारण नाली सड़क से ऊंची हो गई, जिससे पानी नही निकल पाती है। चलना मुश्किल हो जाती है। कोई भी ग्राहक नही करते हैं इधर का रुख : राजू

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राजू कुमार का कहना है कि बरसात के दिनों में इस रोड में चलना दिक्कत हो जाता है कोई भी ग्राहक इधर का रुख नही करते हैं। जमा पानी से बदबू भी देता रहता है। देखने मे लगता है कि आ गए कोई नदी में : छोटू

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दुकानदार छोटू का कहना है कि बजाजा रोड की हालत बरसात में नारकीय हो जाती है। इस रोड में पानी कुछ इस तरह भर जाता है कि देखने मे लगता है कि कोई नदी में आ गए हैं। बरसात में दुकान खोलने का भी मन नही करता है, क्योंकि कोई ग्राहक इधर आ नही पाता है। ठेहुना तक पानी जमा रहता है।

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