मदनपुर थाने की पुलिस के द्वारा मदनपुर प्रखंड पर हमला करने के मामले में गिरफ्तार विक्की कुमार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने पुलिस को रिमांड पर नहीं दिया। रिमांड नहीं होने के कारण जेल नहीं गया। पुलिस उसे कोर्ट से लेकर थाने लौट गई। पुलिस ने विक्की को पुराने नक्सल कांड में बिना वारंट के गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।

रिमांड के लिए वारंट की खोज होने लगी तो आइओ ने वारंट नहीं दिया। तब थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी को न्यायालय बुलाया गया। थानाध्यक्ष जब न्यायालय पहुंचे तो उनसे गिरफ्तारी का आधार पूछा गया। थानाध्यक्ष के द्वारा बताया गया कि कांड के अनुसंधान में नाम आया है और डायरी में नाम लिखा गया है। जब अनुसंधान मे नाम आने के बावजूद कोर्ट से वारंट नहीं लेने का कारण पूछा गया तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया। घंटों विमर्श के बाद सीजेएम ने बिना वारंट के रिमांड नहीं दिया।

आरोपित नक्सली के अधिवक्ता रामाशीष प्रसाद यादव ने बताया कि मदनपुर थाना पुलिस के द्वारा थाना कांड संख्या 133/14 में गिरफ्तार किया गया है पर इस कांड में यह आरोपित नहीं है। पर्यवेक्षण में इसका नाम नहीं आया है। पुलिस केस डायरी में नाम अंकित कर बिना वारंट के गिरफ्तार किया है। अधिवक्ता ने बताया कि वर्ष 2014 में मदनपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय जलाने मामले में छह प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस विक्की को मामले में पूर्व में गिरफ्तार किया था तब यह नाबालिग होने के कारण रिमांड होम गया भेजा गया था। अधिवक्ता ने बताया कि रिमांड होम भेजे जाने के बाद अधिवक्ता के माध्यम से अन्य कांडों में रिमांड करने के लिए सीजेएम कोर्ट मे आवेदन दी गई थी पर कोर्ट के द्वारा बिना वारंट एवं कोई साक्ष्य के रिमांड नहीं किया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस अगर रिमांड होम में रहते ही रिमांड कर देती तो आज गिरफ्तारी की नौबत नहीं आती। जिस मामले में पूर्व में रिमांड होम जा चुका है उसी मामले में पुन: गिरफ्तारी की गई है। अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस सीजेएम कोर्ट में वारंट के लिए आवेदन देगी तब इसे रिमांड किया जाएगा। अधिवक्ता ने बताया कि पूरे मामले से कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।

Posted By: Jagran

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