औरंगाबाद। प्रखंड के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल उमगा पहाड़ के गर्भगृह मे अति प्राचीनतम काल भैरव मंदिर (मटुक भैरो मंदिर) अनदेखी व जानकारी के कारण उपेक्षित है। तांत्रिक बालमुकुंद पाठक ने बताया कि काल भैरो की पूजा दक्षिण दिशा में किया जाता है। कारण यह मंदिर भी पहाड़ के निचले भाग में दक्षिण दिशा में गुफानुमा मंदिर में काल भैरव स्थापित हैं। यह मंदिर दुर्लभ, पुरातत्व और धार्मिक ²ष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह मंदिर कामाख्या मंदिर जैसा प्राचीनतम प्रतीत होता है, जो नामकरण के अनुसार स्थान भी मिलता है। यहां जानकार साधक व श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। बालमुकुंद पाठक की माने तो महीने के सभी शनिवार, अमावस्या व चतुर्दशी तिथि एवं मंगलवार को पड़ने वाला अमावस्या को पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। भयानक रोग से ग्रसित लोगों को भी यहां आकर पूजा करने से स्वस्थ हो जाता है। कहा कि भैरो के आठ रुप हैं जिसमें विशेषकर राजस भैरो, तामस भैरो, बाल भैरो के साधक होते है। बाल भैरो की पूजा अर्चना से संतान की प्राप्ति होती है। बता दें कि मां उमंगेश्वरी मंदिर जैसा हजारों टन वजन वाला पत्थर के गुफानुमा मंदिर में काल भैरो विराजमान हैं। यह मंदिर की रख रखाव के साथ आवागमन की सुविधा मुहैया कराने की जरूरत है।

Posted By: Jagran

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