औरंगाबाद। प्रखंड के मध्य विद्यालय निरंजनापुर में बुधवार को सिख संप्रदाय के 10 वें गुरु गुरुगोविद सिंह की जयंती मनाई गई। प्रधानाध्यापक अविरेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में मनाई गई जयंती समारोह में शिक्षक छात्र-छात्राओं ने अपने अपने विचार रखे। प्रधानाध्यापक ने कहा कि गुरु गोविद सिंह ने खालसा पंथ के लोगों को जरूरी पाठ पढ़ाया था। उन्होंने साल 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोविद सिंह का जीवन अन्याय, अधर्म, अत्याचार एवं दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए गुजरा था। सिख समुदाय के लोग उनकी जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में बड़े ही उमंग एवं उत्साह के साथ मनाते हैं। जयंती के दिन गुरुद्वारों में कीर्तन एवं गुरुवाणी का पाठ होता है। सिख समुदाय के लोग सुबह प्रभातफेरी निकालते हैं एवं लंगर का आयोजन करते हैं। गुरुद्वारों के आसपास खालसा पंथ की झांकियां निकाली जाती है एवं लोग घरों में कीर्तन भी करवाते हैं। शिक्षक सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि गुरु गोविद सिंह जी का जन्म बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उनका जीवन परोपकार और त्याग का रहा। गुरु गोविद सिंह ने अपने अनुयायियों को मानवता शांति, प्रेम, करुणा, एकता एवं समानता का पाठ पढ़ाया। हिदू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोविद सिंह जी का जन्म पौष महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। उन्होंने खालसा वाणी - ''वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह'' भी दी। वे जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत बताए जिन्हें 'पांच ककार' कहा जाता है। पांच ककार में ये पांच चीजें आती है जिन्हें खालसा सिख धारण करते हैं। ये हैं- 'केश', 'कड़ा', 'कृपाण', 'कंघा' और 'कच्छा'. इन पांचों के बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता है। उनकी जयंती पर संपूर्ण विश्व में सिख समुदाय उन्हें याद कर अपने समर्पण को दर्शाते हैं। इस मौके पर मृदुला सिन्हा कुमारी, संध्या सरिता कुमारी, छात्रा स्नेहा कुमारी समेत भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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