औरंगाबाद। इस्लाम के अनुयायियों के लिए माह-ए-रमजान सबसे पाक महीना होता है। इस पवित्र महीने में जुमा (शुक्रवार) का खास महत्व है। वार्ड पार्षद रसीदा खातून के प्रतिनिधि मुन्ना नौशाद ने बताया कि हर रोज की अपेक्षा शुक्रवार का दिन किए जाने वाले इबादत का फल दोगुना प्राप्त होता है। आज तीसरा शुक्रवार है। इस बार पाच शुक्रवार पड़ रहा है। बताया कि अलविदा जुमा अर्थात ईद के त्योहार से पहले का शुक्रवार काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मुस्लिमों के लिए इस दिन का काफी धार्मिक महत्व है। बताया कि ईद इस्लाम का काफी महत्वपूर्ण त्योहार होता है। 30 दिनों तक हर घर में इबादत होती है। कई तरह के धार्मिक कार्य होते हैं।

सिर्फ विवश के लिए माफ है रोजा न रखना

दाउदनगर (औरंगाबाद) : माह-ए-रमजान के पाक महीने में इफ्तार रखना और पाच वक्त का नमाज पढ़ना ही सिर्फ महत्वपूर्ण नहीं है। 60 वर्षीय शेख मो. जुबैर ने बताया कि रमजान शरीफ में बहुत ही परहेज करना है। दुनियावी माहौल से दूर रहना है। ऐसे तो जिंदगी भर दुनियावी माहौल से बचना चाहिए, किंतु रमजान का महीना खास है और इसमें जितना अधिक इबादत करेंगे उतना अधिक पुण्य प्राप्त होगा। कहा कि जो लोग रोजा नहीं रखते और रखने का ढोंग करते हैं या झूठ बोलते हैं कि रोजा में है यह रोजा न रखने से अधिक बड़ा पाप है। कहा कि रोजा सबको रखना है। सिर्फ विवश आदमी के लिए ही माफ है। कहा कि झूठ बोलना बिल्कुल प्रतिबंधित है। कहा कि किसी भी तरह के गलत कार्य से बचना चाहिए। पूरे साल किंतु रमजान में हर हाल में इससे बचना चाहिए। कहा कि बदन, आख, कान, नाक को भी गलत कार्य से बचाना है रोजा में। यह अतिआवश्यक है। न शरीर का गलत कार्य के लिए इस्तेमाल हो, न गलत देखें, न सुने। कहा कि लोग अफ्तारी देते हैं, किंतु इसमें सबसे अधिक गरीब रोजदारों को दावत देना है। न कि अपने समृद्ध और रसूखदारों को ही केवल। कहा कि इन्हें भी आमंत्रित करें, किंतु जोर गरीबों पर देना हैं। कहा कि जकात और फितरा भी निकाला जाना आवश्यक है। इससे गरीबों को यतीमखानों को आर्थिक मदद मिलती है।

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