रफीगंज पशु अस्पताल में 3 घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करते रहे पशुपालक, बाद में कर्मचारी ने थमाई दवा
रफीगंज पशु चिकित्सा केंद्र में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण पशुपालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जहां अंततः चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ने दवा दी।

रफीगंज पशु अस्पताल
HighLights
रफीगंज पशु अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति से पशुपालक परेशान।
तीन घंटे इंतजार के बाद चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ने दी दवा।
अस्पताल परिसर बदहाल, निजी इलाज का खर्च बढ़ा।
अनिल मिश्रा, रफीगंज (औरंगाबाद)। प्रखंड परिसर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र की व्यवस्था मंगलवार को जांच के दौरान सवालों के घेरे में आई। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे पशुपालकों को चिकित्सक के बजाय चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के भरोसे रहना पड़ा।
अदलपुर गांव के राजकुमार और कुंदन कुमार अपनी गाय के इलाज के लिए करीब तीन घंटे तक अस्पताल में इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सक या कोई अन्य स्टाफ उन्हें देखने नहीं आया।
अंततः चतुर्थवर्गीय कर्मचारी जितेंद्र कुमार ने बाहर आकर दवा दी। जब प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा. मुकेश कुमार गौरव और डाटा आपरेटर शिवपूजन चौहान के बारे में पूछा गया, तो कर्मचारी ने बताया कि दोनों ईटार पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर में गए हैं।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
तेलथुआ गांव के राजेंद्र सिंह भी अपने पशु की बीमारी बताकर दवा लेने पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। चिकित्सक की अनुपस्थिति में पशु की बीमारी की जांच और उपचार की व्यवस्था चतुर्थवर्गीय कर्मचारी द्वारा की गई, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सुविधाएं रहने के बावजूद परिसर बदहाल
अस्पताल के पास भवन, चिकित्सक क्वार्टर, पशु शेड, चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के रहने की व्यवस्था, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। भवन के सामने घास-झाड़ियां उगी हुई थीं और परिसर में कीचड़ फैला था।
निजी चिकित्सालय में बढ़ जाता है खर्च का बोझ
खंडवा गांव के सुनील सिंह और अरविंद मिश्रा ने बताया कि सरकारी पशु चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ जाता है। कई बार अस्पताल आने के बाद निराश होकर लौटना पड़ता है। चिकित्सक और डाटा आपरेटर की अनुपस्थिति के कारण दवा, टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिल सकी।
हम ईटार में आयोजित सहयोग शिविर में आए हैं। इसी कारण चिकित्सक और कर्मी अस्पताल नहीं आए हैं। चिकित्सक एवं कर्मी की कमी नहीं है। - डॉ. मुकेश कुमार, प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी, रफीगंज।
