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रफीगंज सीएचसी में बढ़ा मरीजों का बोझ, 16 में से केवल 1 डॉक्टर के सहारे चल रहा अस्पताल

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:21 PM (IST)

रफीगंज सीएचसी में मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों का बोझ बढ़ गया है, जहाँ प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक मरीज आ रहे हैं।

रफीगंज सीएचसी में बढ़ा मरीजों का बोझ

रफीगंज सीएचसी में बढ़ा मरीजों का बोझ

HighLights

  1. रफीगंज सीएचसी में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज।

  2. 16 डॉक्टर पदों पर केवल एक एमबीबीएस चिकित्सक।

  3. कई महीनों से मच्छरों के लिए फागिंग नहीं।

संवाद सूत्र, रफीगंज (औरंगाबाद)। मौसम में बदलाव के साथ बुखार और मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। रफीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रतिदिन औसतन 200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। गुरुवार को यह संख्या 217 रही, जबकि इमरजेंसी में बुखार से पीड़ित 50 से अधिक मरीज आए। 

डेंगू और मलेरिया से निपटने के लिए जांच किट और आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। 16 स्वीकृत चिकित्सकीय पदों के मुकाबले केवल एक एमबीबीएस चिकित्सक कार्यरत हैं, और कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। अस्पताल में 30 बेड हैं, जिनमें से नौ पर प्रसूता भर्ती हैं। 

मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त बेड लगाने की व्यवस्था की बात अस्पताल प्रबंधन ने कही है। फिलहाल डेंगू का कोई मरीज नहीं है, और डेंगू के मरीजों के लिए अलग वार्ड नहीं है। जेई-एईएस वार्ड में ही बेड की व्यवस्था की गई है। मच्छरदानी की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिलती।

कई महीनों से फागिंग नहीं होना चिंता का विषय

सीएचसी में एनएस-1, आइजीएम, मलेरिया, सीबीसी, प्लेटलेट, टाइफाइड, यूरिन समेत कई जांच की सुविधा उपलब्ध है। प्लेटलेट की जांच 24 घंटे होती है और रिपोर्ट डेढ़ से दो घंटे में मिल जाती है। पैरासिटामोल, ओआरएस, आइवी फ्लूड, एंटीबायोटिक, मलेरिया की दवाएं, डेंगू की सपोर्टिव दवाएं, बच्चों की आवश्यक दवाएं और सर्पदंश की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। 

अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेहतर है, जलजमाव नहीं है और नालियों की नियमित सफाई होती है। आरओ से पेयजल उपलब्ध है और बायोवेस्ट का प्रतिदिन उठाव होता है। अस्पताल को कायाकल्प और एनक्वास जैसे पुरस्कार मिल चुके हैं, लेकिन मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए कई महीनों से फागिंग नहीं होना चिंता का विषय है।

दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात एएनएम यहां आकर करते हैं काम

नर्सिंग स्टाफ के 16 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल पांच कर्मी कार्यरत हैं। एएनएम के दो स्वीकृत पद हैं, लेकिन दोनों खाली हैं। दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात एएनएम को बुलाकर काम चलाया जा रहा है। प्रत्येक शिफ्ट में एक एमबीबीएस, एक आयुष चिकित्सक और आठ नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता बताई गई है। 

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और एनआइसीयू जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण इनका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। बच्चों के लिए अलग पेडियाट्रिक वार्ड नहीं है। गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए चार एंबुलेंस उपलब्ध हैं। 108 और 102 एंबुलेंस की स्थिति अच्छी बताई गई है।

पड़ताल में व्यवस्था की स्थिति

  • कुल बेड - 30, भर्ती प्रसूताएं : 09
  • प्रतिदिन औसत ओपीडी : करीब 200
  • गुरुवार को ओपीडी में : 217
  • इमरजेंसी में बुखार मरीज : 50 से अधिक
  • डेंगू जांच व मलेरिया जांच : उपलब्ध
  • प्लेटलेट जांच : 24 घंटे
  • दवाओं का स्टॉक : पर्याप्त
  • अलग डेंगू वार्ड : नहीं
  • फागिंग : कई माह से नहीं
  • पेडियाट्रिक वार्ड : नहीं
  • एंबुलेंस : 04
  • बायोवेस्ट उठाव : प्रतिदिन