औरंगाबाद। पंचायत चुनाव में बदलाव की बयार ऐसी बही कि निवर्तमान मुखिया एक-एक धराशायी हो गए। अब तक जो परिणाम आया है, उससे यह साफ हो गया है कि जनता ने नए चेहरों पर दांव खेला है। पुराने को सिरे से नकार दिया है। औरंगाबाद प्रखंड की 15 पंचायतों में मतदान हुआ था। रविवार को 13 का परिणाम घोषित हुआ है, इसमें दो मुखिया दोबारा जीतने में कामयाब रहे हैं। दो मुखिया का चुनाव नहीं लड़ सके। नौ को हार झेलनी पड़ी है। खैरा बिद से मुखिया सुजीत कुमार सिंह एवं परसडीह से उषा देवी दोबारा विजयी हुए हैं। सबसे पहले पड़रावां पंचायत की मतगणना प्रारंभ हुई। सामान्य सीट से अनिल पासवान चुनाव जीत गए। निवर्तमान मुखिया गुलशन कुमार चुनाव हार गए। कर्मा भगवान पंचायत में वीरेंद्र राम बनाम वीरेंद्र राम लड़ाई थी। इस पंचायत को लेकर जनता में खूब चर्चा हो रही थी। चुनाव लड़ रहे एक 65 वर्षीय वीरेंद्र ने ग्रामीणों को अपनी ओर खींचने के लिए भावुकता का दांव खेला था। कहा था- अगर मैं चुनाव नहीं जीता तो जान दे देंगे। उनकी भावुकता काम कर गई और अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट से निवर्तमान मुखिया वीरेंद्र राम को पराजय झेलना पड़ा।

इब्राहिमपुर पंचायत से निवर्तमान मुखिया बालमुकुंद यादव चुनाव हार गए। पिछली दफा उन्होंने ब्रजमोहन यादव को मात दिया था इस बार बड़े मतों के अंतर से हार गए। बेला पंचायत से चुनाव लड़ रहे मछलिया बाबा इस बार चुनाव जीतने में सफल रहे। उनकी पत्नी चंचला देवी ने निवर्तमान मुखिया अणु कुमारी को पराजित कर दिया। पोइवां पंचायत से मुखिया रहे रंजन कुमार चुनाव हार गए। इन्हें शिवकुमार ने पराजित किया। पोइवां पंचायत बिहार विभूति डा. अनुग्रह नारायण सिंह एवं पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा उर्फ छोटे साहब का गांव है, जिस कारण यह पंचायत सुर्खियों में रहता है।

बदलाव की बयार में ओरा पंचायत मुखिया भी बह गईं। निवर्तमान मुखिया सविता देवी चुनाव हार गईं। हालांकि यहां मुकाबला रोमांचक रहा और जीत-हार का अंतर कम मतों हुआ। पोखराहां पंचायत की मुखिया गुड़िया देवी भी चुनाव हार गईं। जनता ने इन्हें दोबारा चुनाव जीतने का मौका दिया। कुरम्हा पंचायत से मुखिया रहे अभिराम विश्वकर्मा एवं नौगढ़ पंचायत से मुखिया कंचन देवी चुनाव मैदान में नहीं उतरे थे।

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