(औरंगाबाद) : एनआईओएस स्टडी सेंटर राष्ट्रीय इंटर विद्यालय में कला शिक्षा एवं कार्य शिक्षा के प्रयोग से संबंधित तरह-तरह के नवाचार युक्त गतिविधि कराते हुए ट्रेनर डॉक्टर सुनील कुमार ने प्रशिक्षुओं को बताया की बच्चों के लिए सीखना तब आसान हो जाता है। आनंददाई शिक्षण का माहौल बनाने के लिए नए-नए तकनीक खोजे जा रहे हैं। इसी क्रम में सीखना, करके सीखना, गतिविधि आधारित अधिगम आदि अनेक शिक्षा शास्त्रीय उपागम है जो बाल केंद्रित शिक्षा से प्रेरित है। कला शिक्षा से विषयों के बीच की दीवारें न केवल नीचे होती हैं बल्कि विविध अवधारणा, दक्षता एवं कौशलों के विकास के साथ आकलन एवं मूल्यांकन का उपयुक्त अवसर उपलब्ध होता है। डा. सुनील कुमार ने बताया कि कला के विविध पक्ष न केवल अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है बल्कि तथ्यात्मक एवं अवधारणा त्मक समझ एवं संप्रेषण को सुनिश्चित करता है। कला शिक्षा के प्रयोग के अंतर्गत आइस ब्रेकर के माध्यम से विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को खेल खेल में बच्चों के बीच प्रस्तुत करने के कौशल को प्रशिक्षुओं ने बड़े ही आनंद के माहौल में सीखा। कला अभिनय के माध्यम से भी प्रशिक्षुओं ने बच्चों के पाठ्य पुस्तकों की कविता एवं कहानियों को प्रस्तुत किया। केंद्र समन्वयक महेंद्र प्रसाद ¨सह, ट्रेनर हीरालाल समेत अन्य शिक्षक एवं प्रशिक्षु शामिल रहे।

Posted By: Jagran

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