संवाद सूत्र, नवीनगर (औरंगाबाद) : समय : 7.21 बजे, स्थान : नवीनगर प्रखंड का उत्क्रमित उच्च विद्यालय शिवसागर, दिन : शनिवार। विद्यालय का मुख्य द्वार खुला था। प्रधानाध्यापक अब्दुल रसीद अंसारी अपने कक्ष में कार्य कर रहे थे। विद्यालय परिसर में 20 से 25 छात्र-छात्राएं टहल रहे थे। सभी वर्ग कक्ष में ताला लटका था। प्राचार्य के अलावा एक भी शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं थे। प्राचार्य ने बताया कि यहां मेरे अलावा चार शिक्षक एवं एक टोला सेवक पदस्थापित है। वे लोग अभी आते ही होंगे। इसी बीच 7.25 बजे शिक्षक साहिन याश्निक पहुंची। शैक्षणिक कार्य के प्रति लापरवाह हैं शिक्षक

7.40 बजे तक विद्यालय में शिक्षक रामप्रवेश राम, किरण कुमारी एवं टोला सेवक उपेंद्र कुमार नहीं पहुंचे थे। इससे स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक कार्य के प्रति ये शिक्षक लापरवाह हैं। इन्हें विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं। यही कारण है कि ग्रामीण अपने बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ाई के लिए भेज रहे हैं। हद यह कि विद्यालय खुलने का समय 6.30 बजे है परंतु 7.40 बजे तक चेतना सत्र प्रारंभ नहीं हुआ। इस विद्यालय में बच्चों को किस तरह की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही होगी यह सोचा जा सकता है। साथ ही टोला सेवक का कार्य बच्चों को विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करना है परंतु ये गायब रहते हैं। नामांकित छात्र 45, शिक्षक शून्य

उत्क्रमित उच्च विद्यालय शिवसागर में वर्ग नवम एवं दसवीं में कुल नामांकित छात्र 45 है परंतु पदस्थापित शिक्षक एक भी नहीं हैं। अब सोचा जा सकता है कि बगैर शिक्षक के छात्र-छात्राएं कैसे ज्ञानी बन रहे हैं। चौपट शिक्षा व्यवस्था का ये छात्र शिकार बन चुके हैं। न तो अधिकारियों के द्वारा इस पर संज्ञान ली जाती है और न जनप्रतिनिधियों के द्वारा। यही नहीं वर्ग एक से आठवीं तक 250 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं परंतु शिक्षक मात्र पांच हैं। इनमें एक प्रधानाध्यापक हैं जो विद्यालय के कार्य से समय नहीं मिल पाता कि वे पढ़ा भी पाएंगे। इस पर विभाग व सरकार को विचार करने की आवश्यकता है। विद्यालय जांच के बाद कार्रवाई नहीं करते अधिकारी

जिला के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा विद्यालय की जांच की जाती है। जांच में गड़बड़ी मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती है। जिसका नतीजा विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रही है। शिक्षक विद्यालय से गायब रह रहे हैं परंतु कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चों का भविष्य अंधकारमय होते जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस गर्मी में एसी में आराम फरमा रहे हैं और शिक्षक घर में। बच्चों को पढ़ाई व सिलेबस कैसे पूरा होगा इसके बारे में कोई सोचने वाला नहीं है। अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति कर बैठ जाते हैं। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को जांच के लिए आदेश दिया जाएगा। स्पष्टीकरण की मांग होगी। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था के साथ कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए विभाग कार्य कर रहा है।

संग्राम सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी, औरंगाबाद।

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