औरंगाबाद। सरकार शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालय बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। परंतु जहां पहले से शौचालय बने हैं, उसका कोई हाल लेने वाला नहीं है। औरंगाबाद प्रखंड की ओरा पंचायत के कइल बिगहा गांव में सामुदायिक शौचालय बना था। इसका निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया है। यह गांव महादलितों की है। सरकार ने महादलितों को खुले में शौच मुक्त कराने के लिए इस सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया था। परंतु शुरू होने के एक महीने बाद ही इसकी स्थिति बदहाल हो गई। ऐसे में बहुत सारे लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। उपेक्षा के चलते सामुदायिक शौचालय प्रयोग में भी नहीं लिया जा रहा है। खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सरकार के तमाम प्रयास यहां उल्टा साबित हो रहा है। यहां महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग छह शौचालय बनाए गए थे। लेकिन, आज सभी बदहाल स्थिति में हैं। बनने के बाद आसपास के लोग इसका इस्तेमाल भी करने लगे। परंतु देखरेख के अभाव में यह बदहाल हो गया। अब यह प्रयोग के लायक नहीं है। शौचालय की सीट खराब होने की स्थिति में है। खुले में शौच को विवश है आधी आबादी

कइल बिगहा समेत कई गांवों में बना सामुदायिक शौचालय की स्थिति काफी बदहाल हो गई है। स्थिति यह है कि कइल बिगहा की आधी आबादी खुले में शौच को लेकर विवश हैं। शौचालय गांव की शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। इससे साफ स्पष्ट हो रहा है कि शौचालय निर्माण में अनियमितता बरती गई है। एक महीने में ही शौचालय बंद हो गया।

--------------- बदहाल है शौचालय : सरोज

कइल बिगहा गांव निवासी सरोज राम ने बताया कि इस शौचालय का निर्माण करीब छह महीना पहले हुआ था। एक महीना पहले इसको शुरू किया गया। शुरू होने के 20 दिनों तक चला। परंतु अब नहीं चल रहा है। शौचालय में पानी डालने पर नहीं जा रहा है। बनने के बाद कोई इसको देखने तक नहीं आया। खुले में ग्रामीण जाते हैं शौच : प्रमोद

ग्रामीण प्रमोद राम ने बताया कि शौचालय शोभा की वस्तु बन कर रह गई है। सरकार द्वारा इसे बनाकर सिर्फ खानापूर्ति कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं है। स्थिति यह है कि आज भी ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हैं। इससे अधिकारियों को कोई लेना-देना नहीं है।

Edited By: Jagran