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पद बदला, शहर बदला, नहीं बदला रिश्ता; 8वीं बार IAS भाई कंवल तनुज को औरंगाबाद की बहनों ने भेजी राखी

Published: Mon, 24 Aug 2026 09:11 AM (IST)

औरंगाबाद की अनुसूचित जाति बस्ती की बहनों ने अपने पूर्व डीएम कंवल तनुज को लगातार आठवें साल राखी भेजी है। ...और पढ़ें

योजना एवं विकास व‍िभाग के सच‍िव कंवल तनुज के ल‍िए राख‍ियां भेजतीं मह‍िलाएं। जागरण

योजना एवं विकास व‍िभाग के सच‍िव कंवल तनुज के ल‍िए राख‍ियां भेजतीं मह‍िलाएं। जागरण

HighLights

  1. औरंगाबाद की बहनों ने पूर्व डीएम कंवल तनुज को राखी भेजी।

  2. यह लगातार आठवां वर्ष है जब राखी भेजी गई।

  3. कंवल तनुज ने डीएम रहते हुए आत्मीय संबंध बनाए थे।

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। सरकारी पद और स्थान बदल जाने के बावजूद कुछ रिश्ते दिलों में हमेशा कायम रहते हैं।

औरंगाबाद की अनुसूचित जाति बस्ती की बहनों ने तत्कालीन डीएम और वर्तमान में बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के सचिव कंवल तनुज के साथ बने भाई-बहन के रिश्ते को आठ वर्ष बाद भी जीवंत रखा है।

लगातार आठवें वर्ष भेजी राख‍ियां 

इस रक्षाबंधन पर भी बहनों ने अपने भाई समान कंवल तनुज के लिए राखी भेजी है। यह लगातार आठवां वर्ष है, जब बहनें पटना स्थित अपने भाई को राखी भेज रही हैं।

बहनों ने राखी पटना पहुंचाने की जिम्मेदारी समाजसेवी मो. शाहनवाज रहमान उर्फ सल्लू खान को सौंपी। उन्होंने राखी पटना पहुंचा दी है।

बहनों का कहना है कि कंवल तनुज जब औरंगाबाद के डीएम थे, तब रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं महादलित बस्तियों में पहुंचते थे और बहनों से राखी बंधवाते थे। प्रशासनिक दायित्व निभाने के साथ उन्होंने लोगों के बीच आत्मीय रिश्ता भी कायम किया था।

मकर संक्रांति पर भी पहुंचते थे बस्ती

बहनों ने बताया कि कंवल तनुज का उनके साथ केवल रक्षाबंधन तक ही रिश्ता नहीं रहा। वे मकर संक्रांति के अवसर पर भी महादलित बस्तियों में पहुंचते थे।

वहां परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर चूड़ा-दही और तिलकुट खाते थे। उनके इस अपनत्व ने लोगों के दिल में उनके लिए विशेष स्थान बना दिया।

कोरोना काल में भी की जरूरतमंदों की मदद

बहनों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कठिन दौर में भी कंवल तनुज ने जरूरतमंद महादलित परिवारों की मदद की थी। यही वजह है कि उनके तबादले और पद बदलने के बाद भी बस्ती की बहनों ने उनसे अपना रिश्ता नहीं तोड़ा।

बहनों का कहना है कि रक्षाबंधन आते ही कंवल तनुज के साथ बिताए पुराने पल और उनकी आत्मीयता याद आ जाती है। उनका कहना है कि पद और दूरी भले बदल गई, लेकिन भाई-बहन के स्नेह का रिश्ता आज भी उतना ही मजबूत है। आठ साल से लगातार राखी भेजकर वे इसी रिश्ते को निभा रही हैं।