करोड़ों का बस स्टैंड बना, फिर भी हाईवे पर बसों का कब्जा... औरंगाबाद के रामाबांध में रोज लग रहा जाम; जिम्मेदार मौन
औरंगाबाद के रामाबांध में करोड़ों की लागत से बने बस स्टैंड के बावजूद बसें नेशनल हाईवे-139 पर खड़ी हो रही ...और पढ़ें

हाईवे से नहीं हटा बसों का दबाव
HighLights
करोड़ों का बस स्टैंड बना, बसें अब भी हाईवे पर।
एनएच-139 पर बसों से रोज लगता है भीषण जाम।
प्रशासन की निष्क्रियता से यात्रियों और राहगीरों को परेशानी।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और बसों के सुरक्षित ठहराव के लिए रामाबांध में करोड़ों रुपये की लागत से बस स्टैंड का निर्माण कराया गया। मकसद था कि बसें निर्धारित परिसर में खड़ी हों और यात्रियों को भीड़भाड़ वाली सड़क पर परेशानी न हो।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। बस स्टैंड होने के बावजूद बसें नेशनल हाईवे-139 पर खड़ी की जा रही हैं और यात्रियों को सड़क पर ही बैठाया जा रहा है। इससे सुबह से देर शाम तक जाम की समस्या बनी रहती है।
बस स्टैंड बना, लेकिन हाईवे से नहीं हटा बसों का दबाव
रामाबांध बस स्टैंड के बाहर एनएच-139 पर बसों का ठहराव यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बसों के सड़क पर खड़े रहने और यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
हाईवे से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों को निकलने में कठिनाई होती है। सड़क पर एक साथ कई बसें खड़ी होने से वाहनों की कतार लग जाती है और जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।
सुविधा परिसर में, यात्रियों को सड़क पर करना पड़ता इंतजार
बस स्टैंड का निर्माण यात्रियों को व्यवस्थित और सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। इसके बावजूद यात्रियों को बस पकड़ने के लिए सड़क किनारे खड़ा होना पड़ता है। बसों के आने-जाने और सवारी बैठाने के दौरान दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
जल्दबाजी में बस पकड़ने वाले यात्रियों के साथ-साथ हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सुबह से शाम तक जाम, राहगीरों की बढ़ती परेशानी
रामाबांध बस स्टैंड के बाहर सड़क पर बसों के ठहराव से दिनभर यातायात प्रभावित होता है। सुबह से लेकर देर शाम तक यहां जाम की समस्या बनी रहती है।
बसों के अचानक रुकने, यात्रियों के चढ़ने-उतरने और वाहनों के एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में सड़क पर दबाव बढ़ जाता है।
इसका असर आम राहगीरों और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर भी पड़ता है। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अनावश्यक समय गंवाना पड़ता है।
रोज सामने आती है समस्या, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
हाईवे पर बसों के ठहराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके बावजूद सड़क पर बसों को खड़ा करने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आने की बात सामने आ रही है।
बस स्टैंड परिसर में बसों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराने और सड़क पर सवारी बैठाने की व्यवस्था पर नियंत्रण जरूरी है। नियमित निगरानी के अभाव में समस्या लगातार बनी रहने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
करोड़ों के खर्च का क्या फायदा, व्यवस्था सुधारने की जरूरत
जब बसों के ठहराव के लिए अलग परिसर उपलब्ध है, तो फिर हाईवे पर बसें खड़ी करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? रामाबांध की मौजूदा स्थिति इस सवाल को खड़ा करती है।
बस स्टैंड का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब बस संचालक निर्धारित परिसर का इस्तेमाल करें और यात्रियों को सड़क पर बैठाने की प्रथा पर रोक लगे।
इसके लिए संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, यातायात प्रबंधन और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
प्रशासनिक पहल से ही मिल सकती है जाम से राहत
रामाबांध बस स्टैंड के बाहर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए बसों का ठहराव परिसर के भीतर सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही, यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए व्यवस्थित स्थान तय करने और हाईवे पर अनावश्यक रुकावट रोकने की जरूरत है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों को रोजाना जाम और असुरक्षित यातायात की समस्या से जूझना पड़ता रहेगा। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस समस्या को दूर करने के लिए कब प्रभावी पहल करते हैं।
