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सुबह योग-पीटी, दिन में पढ़ाई और शाम को भजन-गजल; औरंगाबाद जेल में ऐसे बदल रहा बंदियों का जीवन

Published: Wed, 23 Sep 2026 01:26 PM (IST)

औरंगाबाद मंडल कारा अब शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक बदलाव का केंद्र बन गया है, जहां बंदी योग, पढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।

औरंगाबाद मंडल कारा की लाइब्रेरी में पढ़ते बंदी। सौ-जेल प्रशासन

औरंगाबाद मंडल कारा की लाइब्रेरी में पढ़ते बंदी। सौ-जेल प्रशासन

मनीष कुमार, औरंगाबाद। मुफस्सिल थाना के पास करीब 25 फीट की ऊंचाई वाले औरंगाबाद मंडल कारा की सलाखों में अब सिर्फ कैद की खामोशी नहीं, बल्कि तबले की थाप, करताल की झंकार और पढ़ाई की आवाज सुनाई देती है।

सुबह होते ही जहां बंदी योग और पीटी से दिन की शुरुआत करते हैं, वहीं दिन चढ़ने के साथ कक्षाओं में पढ़ाई और कंप्यूटर प्रशिक्षण का दौर शुरू हो जाता है।

भजन-कीर्तन के साथ गजल की होती है गूंज

शाम होते ही भजन-कीर्तन, गजल और साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जेल का माहौल बदल जाता है। कभी बंदियों के लिए कैदखाना रही औरंगाबाद मंडल कारा अब शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार प्रशिक्षण और सकारात्मक बदलाव का केंद्र बन गई है।

शहर के बीच में व्यवहार न्यायालय के पास पुराने भवन से निकलकर शहर से बाहर नए भवन में संचालित हो रही मंडल कारा में बंदियों को सजा काटने के साथ नई जिंदगी की तैयारी कराने पर जोर दिया जा रहा है।

अशिक्षित बंदियों को साक्षर बनाने से लेकर मैट्रिक-इंटर की पढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, योग, खेलकूद, चित्रकला और सांस्कृतिक गतिविधियों तक की व्यवस्था की गई है।

जेल प्रशासन का प्रयास है कि यहां से निकलने के बाद बंदी अपने अतीत की गलतियों से सीख लेकर शिक्षा और हुनर के सहारे सम्मानजनक जीवन की शुरुआत कर सकें।

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(मंडल कारा के कंप्यूटर क्लास रुम में कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेते बंदी।)

शिक्षा देने के लिए एक शिक्षक की प्रतिनियुक्ति

अशिक्षित बंदियों को साक्षर बनाने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एक शिक्षक की प्रतिनियुक्ति की गई है। शिक्षक प्रतिदिन कक्षा लेकर बंदियों को पढ़ाते हैं।

जो बंदी मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है। इस वर्ष 22 बंदियों का नामांकन कराया गया है।

इनमें 20 बंदी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से मैट्रिक और दो बंदी इंटर की पढ़ाई कर रहे हैं।

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(मंडल कारा में सुबह के समय योगाभ्यास करते बंदी।)

आईटी शिक्षा के लिए लगाए गए हैं पांच कंप्यूटर

तकनीकी शिक्षा के लिए जेल में कंप्यूटर क्लास रुम की व्यवस्था की गई है। पांच कंप्यूटर लगाए गए हैं। प्रतिदिन करीब 20 से 22 बंदी कंप्यूटर कक्ष में प्रशिक्षण लेते हैं।

जेल प्रशासन के अनुसार एक वर्ष में करीब 250 बंदियों को कंप्यूटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस वर्ष 50 बंदियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। इसके अलावा स्मार्ट क्लास भी संचालित की जा रही है।

पुस्तकालय में गीता-रामायण समेत 600 पुस्‍तकें 

बंदियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए पुस्तकालय की स्थापना की गई है। इसमें छह सौ से अधिक विभिन्न प्रकार की किताबें उपलब्ध हैं।

गीता और रामायण सहित धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी रखी गई हैं। बंदियों के वार्ड में प्रतिदिन अखबार पहुंचाया जाता है, ताकि वे देश-दुनिया की गतिविधियों से जुड़े रहें।

सुबह के समय पीटी और योगाभ्यास कराया जाता है, जिसमें करीब ढाई से तीन सौ बंदी शामिल होते हैं। करीब एक घंटे तक योगाभ्यास और पीटी की क्लास चलती है।

शाम के समय होता है भजन और कीर्तन

समय-समय पर चित्रकला, पेंटिंग सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। शाम को भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

जेल रेडियो के माध्यम से प्रेरणादायक प्रसारण और सही रास्ते पर लौटने का संदेश देने वाली कहानियां सुनाई जाती हैं। प्रतिदिन करीब एक घंटे के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम से बंदियों को सकारात्मक माहौल देने का प्रयास किया जाता है।

कहते हैं जेल अधीक्षक

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शिक्षा और कौशल विकास की यह व्यवस्था पुरुष और महिला दोनों बंदियों के लिए है। जेल से निकलने के बाद बंदी स्वरोजगार कर सकें, इसके लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पीएनबी के आरसेटी केंद्र के माध्यम से इस वर्ष मशरूम उत्पादन और उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण कराया गया है। पशुपालन विभाग की ओर से गाय और बकरी पालन का प्रशिक्षण भी दिया गया। उद्देश्य है कि जेल की चारदीवारी से बाहर निकलने के बाद बंदियों के हाथ में सिर्फ रिहाई का कागज नहीं, बल्कि रोजगार का हुनर भी हो।

दीपक कुमार, जेल अधीक्षक