विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एक तालाब से दो कमाई! मोती के साथ महाझिंगा से 10 लाख तक की आय, औरंगाबाद में द‍िखा फार्मूला

Published: Wed, 07 Oct 2026 06:01 PM (IST)

औरंगाबाद के किसान अब एक ही तालाब में मोती और महाझिंगा की खेती कर दोहरा लाभ कमा रहे हैं। मत्स्य ...और पढ़ें

सिप से मोती निकालते जिला मत्स्य पदाधिकारी राजेश कुमार पंडित और तलाब से निकला महाझ‍िंगा। जागरण

सिप से मोती निकालते जिला मत्स्य पदाधिकारी राजेश कुमार पंडित और तलाब से निकला महाझ‍िंगा। जागरण

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। अब औरंगाबाद की धरती पर तैयार मोती देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी चमक बिखेरेगा। जिले के किसानों को मोती की खेती से जोड़ने की पहल शुरू हो गई है।

ओबरा प्रखंड के सोनहुली गांव में प्लान के तहत मोती उत्पादन की शुरुआत की गई है। खास बात यह है कि एक ही तालाब में मोती के साथ महाझिंगा की भी खेती की जा रही है।

इससे किसानों को एक ही तालाब से दोहरा लाभ मिलेगा। महज एक बीघा जमीन में मोती व महाझिंगा की खेती कर किसान दो वर्ष में करीब 10 लाख रुपये तक आमदनी कर सकेंगे।

एक ही तालाब में मोती के साथ महाझिंगा की हो रही खेती

यह कार्य मत्स्य विभाग के मत्स्य प्रजाति विविधिकरण की योजना के तहत हो रहा है। मत्स्य विभाग हद कदम पर सहयोग कर रहा है।

ओबरा प्रखंड के सोनहुली गांव से मोती व महाझिंगा पालन शुरु किया गया है। यहां रसमुना देवी व रवि कुमार ने महाझिंगा एवं अक्ष्य कुमार व राणा प्रताप ने मोती उपजाना शुरू कर दिया है।

इन किसानों ने करीब आधा एकड़ में तालाब खोदवा यह कार्य शुरु किया है। किसानो ने बताया कि यह खेती मत्स्य विभाग की प्रेरणा से शुरु की है। कोलकाता से बीज मंगवाया गया है। अब यहा कार्य हो रहा है। बेहतर आमदनी का यह बेहतर माध्यम है।

  • ओबरा के सोनहुली गांव में प्लान के तहत शुरु हुई है यह खेती
  • दो वर्ष में करीब 10 लाख रुपये तक आमदनी कर सकेंगे किसान
  • महज एक बिगहा जमीन में ही हो जाएगी महाझिंगा व मोती की खेती
  • औरंगाबाद में तैयार होगा महाझिंगा व मोती, विदेशों तक होगा सप्लाई
  • खेती को लेकर 60 प्रतिशत सब्सिडी किसानों को देगा मत्स्य विभाग
  • टेक्नालाॅजी के जरीए इच्छुक किसानों को किया जाएगा प्रशिक्षित

विदेश तक भेजने की तैयारी

औरंगाबाद में बड़े पैमाने पर महाझिंगा व मोती की खेती चमकेगी। विदेश तक सप्लाई करने की योजना तैयार हो रही है। किसानों को लाखों रुपये का आमदनी होगा।

एक मोती का दाम 200 से लेकर एक हजार रुपए तक होगा। ए ग्रेड मोती का दाम एक हजार, बी ग्रेड का 500 व सी ग्रेड का 200 रुपये में बिकेगा। वहीं महाझिंगा करीब 500 रुपये किलो तक बिकेगा।

10 लाख तक होगी आमदनी

किसान एक ही तालाब में महाझिंगा से लेकर मोती तक खेती कर सकेंगे। महाझिंगा तैयार होने में आठ माह जबकि मोती तैयार होने में 18 माह का समय लगता है।

किसान इन तालाब में महाझिंगा व मोती के अलावा भारतीय मेजर कार्प जैसे कतला, रोहू, मृगल क्वालिटी के मछली का भी पालन कर सकेंगे।

अगर किसान बेहतर ढंग से खेती करें तो करीब एक बीघा में दो वर्ष में 10 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। सलाना पांच लाख रुपये तक की बेहतर आमदनी होगी।

60 प्रतिशत मिल रही सब्सिडी

किसानों को महाझिंगा एवं मोती की खेती के लिए 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है। जिला मत्स्य पदाधिकारी राजेश कुमार पंडित ने बताया कि महाझिंगाा के आधा एकड़ की तालाब में पालन करने में किसानों को करीब एक लाख 10 हजार रुपये खर्च है। 

जबकि 66 हजार रुपये सब्सिडी मिल जा रही है। वहीं मोती की खेती में 2,24,600 रुपये लागत लगेगी। इसमें भी 60 प्रतिशत अनुदान है।

हाई प्रोटीन डायट है महाझिंगा

महाझिंगा हाई प्रोटीन डायट है। आसानी से यह पच जाता है। इसमें गुड क्लोस्ट्रोल होता है जो हृदय रोग होने से बचाता है। मोती पालन की संभावनाएं एवं अनुदान कम क्षेत्र में बेहतर आय प्राप्त करने के लिए मोती पालन एक उत्कृष्ट माध्यम है।

तालाबों एवं उपयुक्त जल स्त्रोतों में सीपों का पालन कर कृत्रिम रुप से उच्च गुणवत्ता वाले मोती का उत्पादन किया जाएगा। उत्पादित मोतियों का उपयोग आभूषण, सजावटी वस्तुएं एवं मूल्यवर्धित उत्पादों में किया जाता है।


महाझिंगा व मोती की खेती को लेकर बिहार स्तर पर क्लस्टर सेंटर तैयार होगा। यहीं से आगे का सारा प्लान बनेगा। जिला स्तर पर मछली का बूथ चालू होने वाला है। पालन प्रोजेक्ट के तहत इसमें कार्य हो रहा है। महाझिंगा व मोती का भारत से विदेश तक निर्यात होगा। इसके लिए कार्य किए जा रहे हैं। किसानों की बेहतर आमदनी का यह स्रोत है।
श्री विपिन, उप मत्स्य निदेशक, मगध परीक्षेत्र।