औरंगाबाद: फार्मर रजिस्ट्री में अटकी किसानों की जमीन, पूर्वजों के नाम जमाबंदी बनी रोड़ा
औरंगाबाद जिले में 64 प्रतिशत रैयत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, लेकिन पूर्वजों के नाम जमीन की जमाबंदी होने से कई किसान इससे वंचित हैं।

फार्मर रजिस्ट्री में अटकी किसानों की जमीन, पूर्वजों के नाम जमाबंदी बनी रोड़ा (AI Generated Image)
HighLights
औरंगाबाद में 64% रैयत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हुई पूरी।
पूर्वजों के नाम जमाबंदी होने से कई किसान रजिस्ट्री से वंचित।
जमाबंदी सुधार के लिए 45 दिन का विशेष अभियान चलेगा।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। जिले में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य लगातार जारी है। अब तक करीब 64 प्रतिशत रैयत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। हालांकि, शत-प्रतिशत किसानों को इस प्रक्रिया से जोड़ने के लक्ष्य के सामने अब जमीन की जमाबंदी बड़ी बाधा बनकर सामने आई है।
बड़ी संख्या में किसानों की जमीन अब भी उनके पूर्वजों के नाम दर्ज है। जमीन पर खेती करने के बावजूद अपने नाम जमाबंदी नहीं होने के कारण ऐसे किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं।
जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने बताया कि जिले में कुल चार लाख 14 हजार 384 रैयत किसान हैं। कृषि विभाग के कर्मियों ने गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराने का काम किया है। अब मुख्य रूप से वैसे किसान बचे हैं, जिनकी जमीन की जमाबंदी उनके नाम पर नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ भविष्य में फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर देने की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में किसानों के लिए जमीन की जमाबंदी अपने नाम कराना जरूरी हो गया है।
12 सितंबर तक 1.29 लाख किसानों की रजिस्ट्री
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 12 सितंबर तक जिले में कुल 1,29,194 फार्मर रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं। इनमें औरंगाबाद प्रखंड में सबसे अधिक 16,201 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। रफीगंज में 15,561 और नबीनगर में 15,011 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।
इसके अलावा कुटुंबा में 12,682, दाउदनगर में 10,940, बारुण में 10,726, ओबरा में 10,610, गोह में 10,514, मदनपुर में 10,032, देव में 8,498 और हसपुरा में 8,419 रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं।
जमाबंदी सुधार को 45 दिन विशेष अभियान
किसानों की समस्या के समाधान के लिए अगले 45 दिनों तक प्रत्येक प्रखंड में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों में जमाबंदी से संबंधित त्रुटियों और नाम दर्ज कराने से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। जमाबंदी अपने नाम होने के बाद संबंधित किसान की फार्मर रजिस्ट्री कराई जाएगी।
विभाग का मानना है कि इससे बड़ी संख्या में छूटे किसानों को रजिस्ट्री से जोड़ने में मदद मिलेगी और उन्हें कृषि विभाग एवं सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी।
