जागरण संवाददाता, औरंगाबाद : औरंगाबाद जिले में देव समेत सभी प्रमुख स्थानों पर लोक आस्था का महापर्व कार्तिक छठ उदीयमान सूर्य के अ‌र्घ्य के साथ सोमवार को संपन्न हो गया। सूर्य नगरी देव में 15 लाख से अधिक व्रतियों ने अ‌र्घ्य दिया। देव में व्रती रात भर अ‌र्घ्य देते रहे। डीएम सौरभ जोरवाल, एसपी कांतेश कुमार मिश्र, डीडीसी अभ्येंद्र मोहन सिंह, एसडीएम विजयंत, एसडीपीओ स्वीटी सेहरावत मेला का जायजा लेते रहे। चार दिनों तक व्रती सूर्य उपासना में लीन रहे । भीड़ अधिक होने के कारण जीटी रोड देव मोड़ के पास ही वाहनों को प्रशासन के द्वारा रोक दिया गया था। 
छह किलोमीटर पैदल चल सूर्यकुंड तालाब पहुंचे
स्थिति ऐसी बन गई कि व्रती व श्रद्धालु छह किलोमीटर पैदल चलकर ऐतिहासिक सूर्य मंदिर व सूर्यकुंड तालाब पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में जिला व पुलिस प्रशासन की टीम तैनात रही। देव मेला परिसर में बड़ी संख्या में दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी की तैनाती की गई थी। देव में भक्तों की भीड़ के आगे जगह कम पड़ गई। खेतों में धान लगे रहने के कारण व्रतियों को परेशानी हुई। देव पहुंचे श्रद्धालुओं ने जहां जगह मिली डेरा डाल दिया। श्रद्धालुओं की भीड़ से पैदल चलना मुश्किल रहा। अ‌र्घ्य के समय सूर्यकुंड एवं रुद्रकुंड तालाब एवं दर्शन के समय सूर्य मंदिर के पास पैर रखने की जगह नहीं थी। 
आज दस बजे तक श्रद्धालुओं ने दिया अ‌र्घ्य 
दूसरे राज्य से पहुंचे कई श्रद्धालु रविवार की रात दो अ‌र्घ्य देकर वापस लौट गए। रविवार को रात भर एवं सोमवार की सुबह दस बजे तक श्रद्धालुओं ने अ‌र्घ्य दिया। मंदिर परिसर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सूर्य मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन कराने को लेकर भीड़ रही। यहां अ‌र्घ्य देने वाले श्रद्धालुओं ने कहा कि व्यवस्था और मजबूत करने की जरूरत है। भीड़ के कारण श्रद्धालुओं के परिजन बिछड़ गए जिस कारण परेशानी हुई। 
10 राज्यों के व्रतियों ने किया अर्घ्य अर्पित
करीब 10 राज्यों के व्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि देव की जितनी महिमा है उसके मुताबिक विकास नहीं हुआ। देव का महत्व पूरे देश में फैलना चाहिए। औरंगाबाद के अदरी नदी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शाम एवं सुबह में अ‌र्घ्य के समय नदी किनारे जगह नहीं बची थी। कुटुंबा प्रखंड के दोमुहान, ओबरा के पुनपुन घाट एवं देवकुंड तालाब घाट पर व्रतियों ने उगते सूर्य को अ‌र्घ्य दिया। यहां भी व्रतियों की भीड़ से पैदल चलना मुश्किल रहा।

Edited By: Prashant Kumar Pandey

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