यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कल्पवृक्ष के कायाकल्प की तैयारी

औरंगाबाद, कार्यालय संवाददाता :
कुटुम्बा प्रखंड के परता धाम स्थित कल्पवृक्ष के कायाकल्प की तैयारी शुरू हो गई है। परता धाम के कल्पवृक्ष को पर्यटन के मानचित्र पर लाने की कवायद की जा रही है। धाम को सड़क मार्ग से जोड़ा जा रहा है। सीएम के प्रस्तावित सेवा यात्रा को ले परता धाम में हलचल बढ़ गई है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार परता धाम कल्पवृक्ष देखने जाएंगे। सीएम को धाम जाने में परेशानी न हो इसका ख्याल अधिकारी रख रहे हैं। सोमवार को ग्रामीणों ने बताया कि एसडीओ कुमार देवेन्द्र प्रोज्ज्वल पांच दिन पहले यहां पहुंचे और कल्पवृक्ष का मुआयना किया। एसडीओ के आदेश पर कल्पवृक्ष के पास विकास कार्य कराए जा रहे हैं। आसपास के इलाके की सफाई की जा रही है। एसडीओ ने बताया कि मुख्य सड़क से धाम को जोड़ने के लिए 28 लाख रुपए की लागत से सड़क का निर्माण कराया जाएगा। स्वीकृति दे दी गई है। सीएम की यात्रा को ले ग्रामीणों के साथ पुजारी नागा गणेश दास भी उत्साहित हैं। कल्पवृक्ष के संबंध में बताया कि समुद्र मंथन के दौरान जो 14 रत्न निकले थे उसमें कल्पवृक्ष एक है। भगवान कृष्ण ने यहां इस वृक्ष को स्थापित किया था। कल्पवृक्ष के समान इस दुनिया में कोई दूसरा वृक्ष नहीं है। यहां जो भी श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं उनकी मन्नतें पूरी होती है। उदाहरण देते हुए नागा गणेश दास ने कहा कि बंगाली स्टेट के श्याम दास ने मन्नतें पुरा होने पर यहां राम, लक्ष्मण, जानकी मंदिर का निर्माण कराया था। पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के दादा विश्ेश्वरदयाल सिंह ने कल्पवृक्ष के पास ही राधा कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया। यहां पहले पुजारी हरेराम ब्रह्माचारी हुआ था करते थे जो अन्न की जगह गोबर सेवन करते थे। कल्पवृक्ष को आज भी दूध से पटाया जाता है। यहां सालों भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। गांव के 62 वर्षीय इन्द्रदेव सिंह एवं 60 वर्षीय जानकी पाण्डेय ने बताया कि हम सभी बचपन से इस वृक्ष को इसी रूप में देख रहे हैं। पहले दादा भी यही बात दुहराया करते थे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां प्रत्येक वर्ष सरकारी मेला का आयोजन होता है।
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