अरवल । अखंड सौभाग्यवती की कामना को लेकर बुधवार को महिलाओं ने हरितालिका तीज व्रत पूरे श्रद्धा व आस्था के साथ मनाया। सुबह से महिलाएं इसकी तैयारी में जुट गई थी। मिट्टी से भगवान शिव तथा माता गौरी की मूर्ति बनाई गई। इस दौरान सामूहिक रूप से महिलाएं एकत्रित होकर गीत गा रही थी। जिससे वातावरण भक्ति में सराबोर हो रहा था। शाम होते ही महिलाएं नए वस्त्रों से सुसज्जित होकर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना प्रारंभ कर दी। देर शाम तक पूजा पाठ का दौर चलता रहा। इसके उपरांत वे लोग पुरोहितों से कथा सुनने लगे। कथा के माध्यम से पति और पत्नी के बीच के रिश्ते के धार्मिक व अध्यात्मिक महत्वों पर चर्चा की गई। कथा वाचन कर रहे पंडित ब्रजेश्वर मिश्र ने कहा कि भादपद मास में हस्त नक्षत्र से युक्त शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को तीज व्रत रखा जाता है। इस व्रत को विवाह से पूर्व भी कन्याएं रख सकती है। इससे मनोवांछित पति की प्राप्ति होती है। विवाहोपरांत इस व्रत के रखने से अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त होता है। इसके साथ ही अन्य प्रकार के सुख एवं एश्वर्य की प्राप्ति भी इससे होता है। उन्होंने कहा कि केवल तीज व्रत कथा सुनने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि पार्वती के पिता ने नारद मुनि को वचन दिया था कि पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करूंगा लेकिन पार्वती भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थी। इसपर उसकी सखियों ने उन्हें वन में ले जाकर तीज व्रत का अनुष्ठान करवाया जिसके प्रभाव से पार्वती की शादी भगवान भोलेशंकर से हो सकी। मान्यताओं के अनुरूप महिलाएं रातजगा कर भगवान की वंदना भी की।

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