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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 30, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए खतरनाक

By JagranEdited By:
Published: Tue, 30 Jul 2019 09:41 PM (IST)Updated: Wed, 31 Jul 2019 06:31 AM (IST)

अरवल। राम चरित्र सिंह महाविद्यालय में मंगलवार को केदार दास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान की जिला इकाई के तत्वाधान ...और पढ़ें

शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए खतरनाक
शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए खतरनाक

अरवल। राम चरित्र सिंह महाविद्यालय में मंगलवार को केदार दास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान की जिला इकाई के तत्वाधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। केदार दास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान के महासचिव प्रो नवीन चंद्र ने कहा कि भारत की वर्तमान शिक्षा नीति ही थोपी हुई है। शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1968 में कोठारी कमीशन के माध्यम से समान शिक्षा नीति को लागू करने की बात उठी थी। लेकिन देश मे शिक्षा का गिर रहा स्तर चिता का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 से ही सामाजिक शिक्षा पर कुठाराघात किया जा रहा है ।

भाकपा के जिला सचिव व अधिवक्ता अरुण कुमार की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन हुआ।कार्यक्रम को डॉ अनिल कुमार राय, पूर्व प्रमुख चितरंजन वर्मा, लालबहादुर पासवान, सुनीता भारती, मुखिया मनोज कुमार अकेला ,चंपा देवी, नागेंद्र मिश्रा, पूर्व मुखिया व पैक्स अध्यक्ष डॉ जितेंद्र शर्मा ,राकेश राही आदि लोगों ने अपना विचार रखा।