चार लोगों को 12 घंटे थाने में रखा, स्वजन से संपर्क भी नहीं करने दिया; अरवल थानाध्यक्ष को IG ने किया सस्पेंड
अरवल में चार लोगों को बिना कानूनी आधार के 12 घंटे तक थाने में रखने के आरोप में सदर थानाध्यक्ष ...और पढ़ें

अरवल थानेदार को आईजी ने किया सस्पेंड।
जागरण संवाददाता, अरवल। अरवल में चार लोगों को बिना कानूनी आधार के करीब 12 घंटे तक थाने में रखने और स्वजन से संपर्क नहीं करने देने के मामले में मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने सदर थानाध्यक्ष दरबारी चौधरी को निलंबित कर दिया है।
मामले की जांच में चारों व्यक्तियों को गैरकानूनी तरीके से थाने में निरुद्ध रखने और उचित जांच किए बिना छोड़ने की पुष्टि हुई है। आईजी ने थानाध्यक्ष के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का भी आदेश दिया है।
यह मामला गत 22 और 23 सितंबर की रात का है। विशेष छापेमारी अभियान के दौरान सदर थाना पुलिस चार लोगों को पकड़कर थाने ले आई थी।
आरोप है कि उन्हें बिना किसी कानूनी आधार के थाने में रखा गया। इस दौरान उन्हें अपने स्वजन से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं दी गई। शिकायत में अवैध वसूली के बाद उन्हें छोड़ने का आरोप भी लगाया गया था।
ऑनलाइन शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़ितों ने इस मामले की ऑनलाइन शिकायत अरवल एसपी से की थी। शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए एसपी ने इसकी जांच एसडीपीओ कुमार संजय को सौंपी।
एसडीपीओ की ओर से प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में थानाध्यक्ष के विरुद्ध लगाए गए प्रमुख आरोपों की पुष्टि हुई। जांच के अनुसार, हिरासत में रखे गए चार लोगों में हरियाणा के तीन और अरवल का एक व्यक्ति शामिल था।
इन्हें करीब 12 घंटे तक गैरकानूनी तरीके से थाने में रखा गया। इसके बाद उचित जांच किए बिना ही छोड़ दिया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने थानाध्यक्ष के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के लिए मगध क्षेत्र के आईजी से अनुरोध किया था।
गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानकर कार्रवाई
जांच प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद आईजी विकास वैभव ने थानाध्यक्ष दरबारी चौधरी के आचरण को कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का द्योतक माना।
इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का आदेश दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान दरबारी चौधरी का मुख्यालय पुलिस केंद्र, अरवल निर्धारित किया गया है।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
आईजी ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, अनुशासन और विधिसम्मत कार्यप्रणाली सर्वोच्च प्राथमिकता है।
किसी भी पुलिस पदाधिकारी द्वारा अपने पद एवं दायित्वों के निर्वहन में अनियमितता बरतने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को पुलिसकर्मियों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
