अररिया। अररिया आकांक्षी जिले की सूची में शामिल है। नीति आयोग द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि क्षेत्रों में देश भर के जिलों का सर्वे कराया गया था। जिसमें देश के 115 जिलों को सबसे पिछड़ा जिले की सूची में शामिल किया गया था। जिसमें अररिया का स्थान 113वां है।

नीति आयोग के निर्देश पर जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, कुशल युवा कार्यक्रम पर कई अभियान चलाए गए। स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में 2019- 20 में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार हुआ। नीति आयोग के समीक्षा के दौरान डेल्टा रैंकिग में सुधार होने पर अररिया को चार कारोड़ अवार्ड दिया गया था। जिला प्रशासन द्वारा चार करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार कर नीति आयोग को भेजा गया। लेकिन आकांक्षी जिला योजना में अभी तक कोई राशि उपलब्ध नहीं हुई है।

चालू योजनाओं से हो रहा है काम:

आकांक्षाी जिला योजना में अररिया जिले को अबतक किसी तरह की राशि नहीं मिली है। जिला नोडल पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि आकांक्षी जिला योजना मद में कोई राशि नहीं मिली है। केंद्र सरकार के अलग अलग चालू योजना से जिले के विकास के लिए खर्च की जा रही है। बिहार शिक्षा परियोजना, एमएसडीपी, जिला कल्याण योजना सहित अन्य चालू योजना की राशि से क्षेत्र का पिछड़ेपन को दूर किया जा रहा है। स्वास्थ, शिक्षा व कुशल युवा कार्यक्रम कई तरह का काम हो रहा है। चार करोड़ रुपये का कार्य योजना का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। राशि मिलने पर प्रत्येक कलेस्टर के दो सरकारी विद्यालयों को मॉडल विद्यालय बनाया जाएगा। जिसमें आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पोषण व स्वच्छता के क्षेत्र में कई रणनीति बनाई गई है। जिसे अमल में लाया जाएगा। क्या है आंकाक्षी जिला परियोजना

यह केंद्र सरकार की स्कीम है। देश के पिछड़े जिलों का त्वरित और कारगर रूप से सुधार करना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के स्कीमों के सहयोग से जिले के समाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्तर आदि में सुधार लाना है। जिसकी मॉनिटरिग नीति आयोग करता है। हर महीने आकांक्षी जिले की समीक्षा होती है। तीन माह पर डेल्टा रैंकिग जारी होता है। पिरामल फाउंडेशन सहित अन्य संस्थाओं व जिला प्रशासन के संयुक्त सहयोग से रैंकिग में सुधार करने का प्रयास होता है। - आर्थिक व समाजिक रूप से पिछड़ा है अररिया

अररिया जिला की की जनसंख्या करीब 30 लाख है। यहां की साक्षरता दर 54 फीसदी है। यहां बेरोजगार की सबसे बड़ी समस्या है। उद्योगधंघे नहीं रहने के कारण दो से तीन लाख लोग अन्य राज्यों में मजदूरी करते हैं। सरकारी स्कूलों में संसाधन की घोर कमी है। शिक्षक, स्कूल भवन की कमी है। हर साल बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होता है। खेतों लगी फसल बर्बाद हो जाती है।

कोट - सरकार की चालू स्कीम के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि क्षेत्रों में काम किए जा रहे हैं। तेजी से विकास हो रहा है। आकांक्षी जिला योजना से अबतक किसी तरह की राशि नहीं मिली है। चार करोड़ रुपये का कार्य योजना तैयार कर प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। राशि उपलब्ध होने पर तय रणनीति के तहत कार्य किए जाएंगे। जिले में आर्थिक पिछड़ापन को दूर करने की हर संभव कोशिश जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। -विकास कुमार, जिला नोडल पदाधिकारी अररिया।

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