अररिया। अररिया लोकसभा 20019 का सेमीफाइल चुनावी मैच बुधवार को राजद- भाजपा के बीच संपन्न हुआ। राजद ने भाजपा के प्रत्याशी को बुरी तरह मात दे दी। अब फाइनल मुकाबला 13 माह के बाद होगा। जीत का परिणाम सामने आते ही भाजपा खेमा में सन्नाटा पसर गया। राजद प्रत्याशी सरफराज आलम 61788 वोट से विजय घोषित हुए। सरफराज आलम को 509334, भाजपा प्रत्याशी प्रदीप ¨सह को 447546 वोट मिले। जबकि तीसरे स्थान पर उपेंद्र साहनी को 18772, ¨प्रस विक्टर को 20922 वोट मिले हैं। लेकिन सबसे मजे की बात यह रही कि 17906 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को नाकार दिया और नोटा में बटन दबाया था। वहीं पिता स्व. तस्लीमुद्दीन के नक्शे कदम पर चलने का वादा करने वाले राजद के सरफराज आलम ने जनता का भरोसा जीत लिया। जीत के बाद सरफराज ने कहा कि अपने पिता तस्लीमउद्दीन के अधूरे सपनों को पूरा करने और सभी समुदाय के लोगों के हित में काम करेंगे। वहीं भाजपा प्रत्याशी ने हार के कारणों की समीक्षा करने की बातें कही। जानकार बताते हैं कि अररिया लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता 43 और यादव वोट 13 प्रतिशत है। कुल छह विधानसभा क्षेत्र से कुल 17,38,067 है मतदाता हैं। जिसमें 58 फीसद मतदाताओं ने लोकसभा उपचुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

2014 व 2009 के क्या थे नतीजे

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में 15,87,348 मतदाताओं में 9,75,811 लोगों ने वोट डाले थे। करीब 61 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया था। इस चुनाव में आरजेडी के तस्लीमुद्दीन को 4,07,978, बीजेपी के प्रदीप कुमार ¨सह को 2,61, 474, जेडीयू के विजय कुमार मंडल को 2,21,769 और बीएसपी के अब्दुल रहमान को 17, 724 वोट मिले थे। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में 2,82, 742 वोट हासिल करके बीजेपी के प्रदीप कुमार ¨सह जीते थे. एलजेपी के जाकिर हुसैन खान को 2,60, 240 और कांग्रेस के शकील अहमद खान को 49,649 मत मिले थे.

भाजपा व जदयू का नाकारी जनता

लोक सभा उपचुनाव में भले ही बीजेपी प्रत्याशी के रूम में चुनाव मैदान में थे। लेकिन गठबंधन का धर्म निभा रहे सीएम नीतीश कुमार के लिए भी यह नाक का सवाल था। साल 2004 और 2009 के चुनाव के दौरान नीतीश कुमार का पिछले कार्यकाल में एनडीए के साथ गठबंधन था। तब अररिया सीट पर बीजेपी जीती थी। बाद में नीतीश कुमार ने आरजेडी से गठबंधन किया और बिहार में सरकार बनाई। इस दौरान साल 2014 के चुनाव में अररिया सीट राजद के खाते में चली गई। अब इस सीट को फिर फिर राजद ने कब्जा जमा लिया। सीट बचाने के लिए जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी सहित सहित प्रदेश व केंद्र के कई मंत्री व भूतपूर्व मंत्रियों ने जनसभा व जनसंपर्क कर भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगने के लिए पूरी ताकत झोंक दिया था। वहीं राजद के पूर्व मुख्यमंत्री ने तेजस्वी यादव व अन्य नेताओं को विश्वास दिलाने में काम हो गए।

Posted By: Jagran