कलाई पर सजनी थी राखी, देनी पड़ी मुखाग्नि; अररिया में नेपाल के शहीद रविंद्र को छोटी बहन ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
अररिया सीमा से सटे नेपाल के शहीद रविंद्र मेहता की अंतिम विदाई ने पूरे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र को शोक में ...और पढ़ें

सीमावर्ती नेपाल के कप्तानगंज निवासी 22 वर्षीय शहीद रविंद्र मेहता की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
HighLights
शहीद रविंद्र मेहता की अंतिम विदाई ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबोया।
छोटी बहन प्रति कुमारी मेहता ने नम आंखों से भाई को मुखाग्नि दी।
रक्षाबंधन से पहले हुई शहादत ने परिवार को गहरा दुख पहुंचाया।
संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले अररिया जिले के फुलकाहा सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले अंतर्गत देवानगंज गांवपालिका के कप्तानगंज (वार्ड संख्या तीन) निवासी 22 वर्षीय शहीद रविंद्र मेहता की अंतिम विदाई ने पूरे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया।
चार बहनों के इकलौते भाई रविंद्र की शहादत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर में रक्षाबंधन को लेकर बहनें अपने इकलौते भाई की कलाई पर राखी बांधने और लंबी उम्र की कामना करने की तैयारियां कर रही थीं, उसी घर से त्योहार से ठीक पहले भाई की अर्थी निकल गई। इस हृदय विदारक दृश्य ने हर किसी का कलेजा चाक कर दिया।
जब छोटी बहन ने नम आंखों से इकलौते भाई को दी मुखाग्नि
रविंद्र मेहता की अंतिम विदाई का सबसे मार्मिक और भावुक क्षण तब आया, जब उनकी सबसे छोटी बहन प्रति कुमारी मेहता ने नम आंखों और कांपते हाथों से अपने इकलौते भाई को मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर भाई की अंतिम विदाई के समय बहन के चेहरे पर जहां अपने इकलौते भाई को हमेशा के लिए खोने का असह्य दर्द था, वहीं रविंद्र की शहादत का गर्व भी साफ झलक रहा था।
चार बहनों के बीच रविंद्र सबसे छोटे और दुलारे थे। परिवार में उनकी मौजूदगी ही बहनों के लिए सबसे बड़ा सहारा और संबल थी, लेकिन नियति का क्रूर चक्र देखिए कि जिस भाई के साथ बहनें खुशियों से रक्षाबंधन मनाने वाली थीं, उसी भाई को अंतिम विदाई देने की भारी जिम्मेदारी छोटी बहन के कंधों पर आ गई।
'वीर सपूत अमर रहे' के नारों से गूंजा क्षेत्र, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
शहीद रविंद्र मेहता की अंतिम यात्रा में नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों से हजारों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और सामाजिक-राजनीतिक लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत पर पुष्प बरसाए और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूरे गांव में मातम पसरा रहा। बहनों और मां की चीत्कार से माहौल इतना गमगीन था कि अंतिम यात्रा में शामिल हर ग्रामीण की आंखें नम हो गईं। उपस्थित जनसैलाब परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाता नजर आया।
शहादत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रखा, हमेशा सालता रहेगा यह रक्षाबंधन
स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध लोगों ने कहा कि महज 22 वर्ष की अल्पायु में रविंद्र मेहता की शहादत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इतनी कम उम्र में उनका इस तरह दुनिया से चले जाना परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
रविंद्र के परिवार के लिए इस बार का रक्षाबंधन जीवनभर की ऐसी टीस और कड़वी याद छोड़ गया है, जिसे भुला पाना नामुमकिन होगा। जिस पर्व पर बहनें भाई के दीर्घायु होने का वरदान मांगती हैं, उसी पर्व से ठीक पहले उन्हें अपने इकलौते भाई की अंतिम विदाई का साक्षी बनना पड़ा।
