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जितिया व्रत में मछली और नोनी का साग खाने की है अनोखी परंपरा, पढ़ें महापर्व की पौराणिक कथा और नियम

Published: Sat, 03 Oct 2026 07:00 AM (IST)

जितिया पर्व पुत्रों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं द्वारा रखा जाने वाला एक कठिन निर्जला व्रत है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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HighLights

  1. पुत्रों की दीर्घायु, आरोग्य और सुखमय जीवन हेतु व्रत।

  2. व्रत से पूर्व मछली और नोनी साग खाने की अनोखी परंपरा।

  3. यह 24 घंटे का निर्जला उपवास, महापर्व माना जाता है।

दीपक कुमार गुप्ता, सिकटी (अररिया )। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवितपुत्रिका पर्व मनाया जाता है। इसे जिउतिया, जितिया या जीवितपुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। पुत्र की दीर्घ, आरोग्य और सुखमयी जीवन के लिए इस दिन माताएं व्रत रखती हैं।

मिथिलांचल का प्रसिद्ध पर्व जितिया काफी चर्चित है। इसे महापर्व नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि, यह सबसे कठिन पर्व माना जाता है।

इस पर्व में जल ग्रहण करने से भी व्रत भंग हो जाता है। लेकिन इस पर्व को करने से पहले महिलाएं मछली का सेवन करती हैं। कई महिलाओं ने बताया कि इस पर्व में व्रत करने से पहले अनेक विधान होते हैं।

जिस प्रकार अन्य व्रतों में अभक्ष्य पदार्थों का त्याग किया जाता है, जैसे लहसुन, प्याज, मरूवा, साग इत्यादि। लेकिन जितिया व्रत में खासकर मछली का विधान है।

इसके साथ मरूआ का भी विधान है, जिसे मछली के साथ ग्रहण करते हैं। इसके बाद नोनी का साग और कर्मी का साग, जिसे मछली के समतुल्य माना गया है। उसका सेवन करके यह व्रत किया जाता है।

यह व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। इस व्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय होता है, जिस दिन महिलाएं नोनी का साग खाती हैं। 

वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु

वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं जिउतिया का निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन माताएं अपनी संतानों की सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये 24 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं। इसे भी महापर्व छठ की तरह तीन दिन पूरे विधि -विधान के साथ किया जाता है।

अहिल्या रानी गुप्ता, विमला देवी, रानी देवी, चंदा कुमारी, रोशनी कुमारी, सुमन रानी, नेहा कुमारी, रानी देवी आदि ने बताया कि आश्विन मास की अष्टमी को ये निर्जला व्रत होता है।

सप्तमी को नहाय खाय, अष्टमी को 24 घंटे का निर्जला उपवास तथा नवमी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। छठ पर्व की तरह जितिया व्रत पर भी नहाय-खाय की परंपरा है।

सप्तमी तिथि को नहाय-खाय के बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की समृद्धि और उन्नत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसके बाद नवमी तिथि यानी अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है। 

पौराणिक मान्यता 

पौराणिक कथाओं के अनुसार अपने पिता की मृत्यु को लेकर अश्वत्थामा बहुत नाराज था। बदले की भावना को लेकर उसने पांडवों के शिविर में घुस कर द्रौपदी के पांचों संतान को सोते हुए अवस्‍था में, पांच पांडव समझकर मार डाला था।

इस अपराध के कारण अर्जुन ने उसे बंदी बना लिया और उसकी दिव्य मणि छीन ली। इसके बाद अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा की अजन्मी संतान को गर्भ में हीं मार डाला।

उत्तरा की संतान का जन्म लेना आवश्यक था। इस कारण भगवान कृष्ण ने अपने सभी पुण्यों का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसको गर्भ में ही पुनः जीवित किया। गर्भ में मरकर जीवित होने के कारण उसका नाम जीवितपुत्रिका पड़ा।

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