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'आंसु से नहीं, नेत्रदान से श्रद्धांजलि' ट्रेन में बजी घंटी व पिघल गया दादा का दिल; पोतियों की जिद से रोशन हुईं जिंदगियां

Published: Sun, 06 Sep 2026 04:32 PM (IST)

Eye Donation: फारबिसगंज के परिहार परिवार ने अपनी परदादी सीता देवी के निधन पर नेत्रदान कर मिसाल पेश की। परपोतियों ...और पढ़ें

Eye Donation: फारबिसगंज में परदादी के निधन के बाद नेत्रदान का साहसिक फैसला लेने वाले परिहार परिवार के सदस्य और दधीचि देहदान समिति के प्रतिनिधि

Eye Donation: फारबिसगंज में परदादी के निधन के बाद नेत्रदान का साहसिक फैसला लेने वाले परिहार परिवार के सदस्य और दधीचि देहदान समिति के प्रतिनिधि

HighLights

  1. फारबिसगंज के परिहार परिवार ने परदादी का नेत्रदान किया।

  2. परपोतियों ने ट्रेन में दादा को नेत्रदान हेतु राजी किया।

  3. कटिहार मेडिकल कॉलेज टीम ने समय पर कॉर्निया सुरक्षित किया।

रूपेश कुमार, फारबिसगंज (अररिया)। Eye Donation: अपनों को हमेशा के लिए खो देने के बाद का समय किसी भी परिवार के लिए असहनीय पीड़ा और आंसुओं का होता है, लेकिन अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित परिहार परिवार ने शोक के सबसे कठिन क्षण में वह कर दिखाया जो पूरे समाज के लिए एक नजीर बन गया है। परिवार की नन्हीं बच्चियों की परिपक्व सोच और संवेदनशीलता के दम पर अपनी परदादी के मरणोपरांत नेत्रदान कराकर दो दृष्टिहीनों की अंधेरी दुनिया को रोशन कर दिया गया।

फारबिसगंज नगर परिषद क्षेत्र के पुस्तकालय रोड (वार्ड संख्या-छह) निवासी प्रकाश परिहार की पूज्य माता सीता देवी का 26 फरवरी की दोपहर निधन हो गया। उस समय मृतका के पुत्र प्रकाश परिहार राजस्थान में थे और घर पर शोक व क्रंदन का माहौल था। इसी बीच देहदान और अंगदान की अलख जगाने वाली संस्था 'दधीचि देहदान समिति' के जिलाध्यक्ष आजातशत्रु अग्रवाल, सचिव पूनम पंडिया और सह-सचिव पप्पू लड्डा शोक-संतप्त परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने मृतका के पौत्र दीपक परिहार (टोनी) से मिलकर नेत्रदान का पावन प्रस्ताव रखा।

  • फारबिसगंज के वार्ड-6 निवासी परिहार परिवार ने परदादी सीता देवी के निधन पर नेत्रदान कर पेश की अनुकरणीय मिसाल

  • मृत्यु के छह घंटे के भीतर कॉर्निया सुरक्षित करने की थी चुनौती; राजस्थान से लौट रहे थे मृतका के पुत्र प्रकाश परिहार

  • परपोती ताशु और वंशिका ने चलती ट्रेन में दादा को फोन कर नेत्रदान के लिए किया राजी, कटिहार मेडिकल कॉलेज की टीम ने लिया कॉर्निया

  • 'दधीचि देहदान समिति' की प्रेरणा से शोक के माहौल में लिया गया ऐतिहासिक फैसला, दो दृष्टिहीनों के जीवन में लौटेगा उजाला

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, मृत्यु के अधिकतम छह घंटे के भीतर ही कॉर्निया का सुरक्षित प्रत्यारोपण संभव होता है। दीपक और उनकी धर्मपत्नी अनुराधा ने अंतर्मंथन के बाद इस पुनीत कार्य के लिए सहमति तो दे दी, लेकिन परिवार के मुखिया यानी मृतका के पुत्र प्रकाश परिहार की अनुमति के बिना यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती थी। प्रकाश परिहार ट्रेन में सफर कर रहे थे और उनके फारबिसगंज पहुंचने तक छह घंटे की अनिवार्य समय-सीमा समाप्त हो जाती।

परपोतियों ने ट्रेन में दादा को किया फोन, समझाई नेत्रदान की महत्ता

इस नाजुक घड़ी में समय तेजी से रेत की तरह फिसल रहा था। तभी मृतका की परपोतियों— ताशु और वंशिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। सफर के दौरान नेटवर्क की भारी दिक्कतों के बीच जैसे ही ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी, बच्चियों ने तुरंत अपने दादा प्रकाश परिहार से फोन पर संपर्क साधा।

बच्चियों ने बड़ी ही शालीनता और समझदारी के साथ अपने दादा से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि केवल आंसुओं में बहने के बजाय यदि परदादी की आंखें किसी की जिंदगी का चिराग बन जाएं, तो यही उनके लिए सबसे सच्ची और पवित्र श्रद्धांजलि होगी। मासूम परपोतियों के इन गहरे और संवेदनशील शब्दों ने चलती ट्रेन में सफर कर रहे दादा के हृदय को झकझोर दिया। उन्होंने बिना कोई संकोच किए फोन पर ही अपनी सहर्ष अनुमति प्रदान कर दी।

कटिहार मेडिकल कॉलेज की टीम ने पूरी की प्रक्रिया

पारिवारिक सहमति की सूचना मिलते ही कटिहार मेडिकल कॉलेज (केएमसीएच) की विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की टीम फारबिसगंज पहुंची। समय की पाबंदी को ध्यान में रखते हुए रात करीब नौ बजे कॉर्निया सुरक्षित करने की पूरी चिकित्सीय प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कर ली गई।

दीपक परिहार और उनके परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि मृत्यु के तुरंत बाद ऐसा निर्णय लेना बेहद हृदयविदारक था, लेकिन जब यह विचार मन में आया कि उनकी दादी की आंखें अब इस खूबसूरत संसार को किसी अन्य के माध्यम से निरंतर देखती रहेंगी, तो दिल के खालीपन को एक असीम शांति और आत्मिक संबल मिला। परिहार परिवार का यह साहसिक फैसला समाज को अंधविश्वास और रूढ़िवादिता की बेड़ियों से निकलकर अंगदान व देहदान की दिशा में आगे बढ़ने का स्पष्ट संदेश देता है।