-ठाकुरगंज प्रखंड में मेची नदी में गिरेगा कोसी का जल

-मेची के माध्यम से महानंदा में पहुंचेगा कोसी नदी का पानी

-------नहर का लोगो----------

राहुल सिंह

संवाद सूत्र, फारबिसगंज(अररिया): कोसी को बाढ़ से निजात दिलाने के लिए कोसी-मेची नदी को जोड़ने की महापरियोजना की चर्चा तीन लगभग दो दशक से सुर्खियों में है। कांग्रेस शासनकाल में एक दशक तक यह योजना लटकी रही। इधर पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को स्वीकृति दी है जिससे कोसी-मेची नदी परियोजना पर कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इस बाबत जल संसाधन विभाग के सूत्र बताते हैं कि कोसी-मेची नदी जोड़ों परियोजना पर कार्य जारी है। लगभग 5500 करोड़ से 120 किमी लंबी नहर बनेगी। इस योजना के पूरा होने से अररिया, किशनगंज व पूर्णिया सहित कोसी के अन्य जिलों के दो लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों को पानी मिलेगा। इसके अलावा बाढ़ से भी लोगों को लगभग मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए कोसी बेसिन के पानी को महानंदा बेसिन में मेची लिक से लाया जाएगा। मेची नदी किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में नेपाल से निकलकर चार-पांचों गांवों के बीच से होते हुए ठाकुरगंज प्रखंड में ही महानंदा में मिलती है। इस योजना की लागत पूर्ण होने तक सात हजार करोड़ रुपये अनुमानित है। केंद्र ने योजना पर मुहर लगाते समय ही यह शर्त लगा दी थी कि पर्यावरण क्लियरेंस बिहार सरकार को लेना होगा। उसी के तहत कार्रवाई की गई। जिन जिलों के लोगों की राय पर्यावरण को लेकर ली गई उनमें सुपौल, सहरसा, अररिया, किशनगंज और पूर्णिया शामिल हैं। इस योजना से लाभान्वित होने वाले जिले भी यही हैं।

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राहुल गांधी के बयान के बाद कार्य था ठप

इस संबंध में सूत्रों ने बताया कि पूरी बहस पर एक तरह से अस्थाई रोक तब लग गई जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के सबसे बड़े घटक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने सितंबर 2009 में चेन्नई में नदी जोड़ योजना के बारे में अपनी व्यक्तिगत राय देते हुए कहा था कि पर्यावरणीय दृष्टि से यह एक बहुत ही खतरनाक योजना है। स्थानीय तौर पर नदी जोड़ का सिचाई में वृद्धि का कुछ अर्थ हो सकता है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर तो यह एक आपदा ही होगी। राहुल गांधी की व्यक्तिगत राय के बाद 6 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इसी आशय का एक बयान दिया । इसके बाद से नदी जोड़ योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। वर्ष 2014 में केंद्र में सरकार बदली तो नदी जोड़ योजना एक बार रफ्तार पकड़ ली है।

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कोसी-मेची नदी जोड़ योजना पर जनता की मुहर 29 मई 2018 में लग गई है। इस योजना की पब्लिक हीयरिग (जन सुनवाई) का काम पूरा हो गया है। कहीं से जनता ने कोई आपत्ति नहीं दर्ज की। पर्यावरण प्रभाव आकलन का काम पहले ही पूरा हो चुका है। अब यह योजना बिना किसी बदलाव लोकसभा चुनाव के बाद मूर्ति रूप में सामने आएगी।

-विद्यासागर केशरी, विधायक फारबिसगंज।

Posted By: Jagran