यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 20, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खेतों के संग सूख रहे किसानों के अरमान
अररिया। अषाढ़ व सावन माह में झमाझम बारिश के बदले तपती धूप के कारण किसान हाथ पर हाथ

अररिया। अषाढ़ व सावन माह में झमाझम बारिश के बदले तपती धूप के कारण किसान हाथ पर हाथ रख बैठें हैं। इस मौसम में जहां किसानों के चेहरे मूसलधार बारिश से खिल उठते थे, वहीं चिलचिलाती धूप के चलते किसानों के माथे पर ¨चता की लकीरें दिख रही हैं। तपती धूप के कारण खेतों में धूल उड़ रहे हैं। किसान सूखा की ¨चता से परेशान हैं। खासकर जोकीहाट, पलासी के क्षेत्र के किसानों का आज भी धान ही मुख्य फसल है। मौसम वैज्ञानिकों ने अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की थी, लेकिन यहां तो सुखाड़ की स्थिति पैदा हो गई है। जुलाई माह में भारी बारिश के कारण लोग बाढ़ की आशंका से डरे रहते थे, लेकिन इस बार जुलाई माह में किसानों के खेतों से कीचड़ के बदले धूल उड़ रहे हैं। इस इलाके में धान बेचकर ही किसान अपने साल-भर का बजट तैयार करते हैं, लेकिन सुखाड़ ने तो उनकी नींद हराम कर दी है। सतबिटा, तारण, डूबा, मटियारी, गैरकी, बगडहरा, केसर्रा, हरदार, बारा, सिसौना, सिमरिया, पथराबाड़ी, महलगांव, चीरह, कुरसैल के सैंकड़ों किसान खेतों में रोपनी के बदले बेरोजगार बैठे हैं। कुरसैल के किसान याकूब आलम ने बताया कि जिन खेतों में रोपनी हो भी गई है उन खेतों में धान के पौधे कड़ी धूप के कारण सूख रहे हैं। नहरों और नलकूपों की कमी के कारण किसान फसलों की ¨सचाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में किसानों के अरमान सूखने लगे हैं।
