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7000 पर मुखिया तो 50000 पर जिप सदस्य! बिहार में पंचायत परिसीमन से बदलेगी सीमा, नए मानक और आरक्षण के नियम को समझ लें

Published: Sat, 12 Sep 2026 04:05 PM (IST)

Bihar Panchayat Election Delimitation: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर शुरू ...और पढ़ें

Bihar Panchayat Election Delimitation: बिहार पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन शुरू, 7 हजार पर मुखिया-सरपंच और 50 हजार पर जिला परिषद; बदलेंगे समीकरण

Bihar Panchayat Election Delimitation: बिहार पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन शुरू, 7 हजार पर मुखिया-सरपंच और 50 हजार पर जिला परिषद; बदलेंगे समीकरण

HighLights

  1. 2011 की जनगणना आधार पर पंचायत परिसीमन शुरू।

  2. मुखिया, सरपंच, जिप सदस्य के लिए नए मानक तय।

  3. आरक्षण रोस्टर के साथ चुनाव में लगेगा एक साल।

संवाद सूत्र, सिकटी (अररिया)। Bihar Panchayat Election Delimitation: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही प्रशासनिक महकमों और ग्रामीण सियासत में सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत पंचायतों और वार्डों के नए सिरे से परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद शुरू कर दी गई है।

यह पूरी प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों को आधार बनाकर की जा रही है। परिसीमन का कार्य संपन्न होते ही त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और ग्राम कचहरी पंच के निर्वाचन क्षेत्रों का पूरा भौगोलिक स्वरूप और सियासी नक्शा बदल जाएगा।

प्रस्तावित नए प्रशासनिक मानकों के अनुसार, अब लगभग 7,000 की आबादी पर एक मुखिया और इतनी ही जनसंख्या पर एक सरपंच का निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित करने की तैयारी है। वहीं, 5,000 की जनसंख्या पर एक पंचायत समिति सदस्य और 50,000 की आबादी पर एक जिला परिषद सदस्य का दायरा तय किया जा सकता है।

इसके अलावा वार्ड सदस्य और पंच पदों का गठन संबंधित क्षेत्र की स्थानीय जनसंख्या के घनत्व और बसावट के अनुपात में किया जाएगा। जनसंख्या के नए संतुलन के आधार पर पंचायतों की सीमाओं और सीमाओं की चौहद्दी का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है।

सिकटी में बीडीओ की देखरेख में कार्य तेज

अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रियदर्शी राजेश पायरट की देखरेख में परिसीमन का कार्य युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है। प्रक्रिया शुरू होते ही ग्रामीण चौपालों और चौक-चौराहों पर चुनावी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। संभावित प्रत्याशी और वर्तमान जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों के नए भौगोलिक और जातिगत समीकरणों का बारीकी से आकलन करने में जुट गए हैं।

  • बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू

  • प्रस्तावित नए मानक: 7 हजार की आबादी पर मुखिया व सरपंच, 5 हजार पर पंचायत समिति सदस्य और 50 हजार पर एक जिला परिषद

  • वार्ड सदस्य व पंच के पदों का निर्धारण स्थानीय जनसंख्या घनत्व के आधार पर होगा; कई पंचायतों और वार्डों की बदलेंगी सीमाएं

  • परिसीमन के बाद जारी होगा नया आरक्षण रोस्टर (SC/ST/EBC/महिला); पूरी चुनावी प्रक्रिया और सूची तैयार होने में लगेगा करीब एक साल

गांवों में तेज हुआ सियासी गुणा-गणित

परिसीमन के चलते कई पंचायतों और वार्डों का विखंडन या पुनर्गठन होना तय माना जा रहा है। जनसंख्या के नए अनुपात के चलते कहीं वार्डों की संख्या बढ़ सकती है तो कहीं छोटे वार्डों का विलय होने से संख्या घट भी सकती है। हालांकि, अंतिम रूप से निर्वाचन क्षेत्रों और पदों की वास्तविक स्थिति प्रारूप प्रकाशन, दावा-आपत्ति आमंत्रण और उनके विधिक निस्तारण के बाद ही अंतिम अधिसूचना के जरिए साफ हो सकेगी।

 तैयार होगा नया आरक्षण रोस्टर

अधिकारियों के मुताबिक, परिसीमन का कार्य पूरा होते ही नए सिरे से आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के लिए पदवार 50 प्रतिशत आरक्षण के मानकों के अनुसार सीटों का नए सिरे से आवंटन और चक्रीय क्रम (रोटेशन) निर्धारित होगा।

चुनाव प्रक्रिया में लगेगा एक साल का वक्त

विशेषज्ञों और प्रशासनिक जानकारों की मानें तो राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव के लिए केवल परिसीमन और सीमाओं के पुनर्निर्धारण की पूरी कानूनी प्रक्रिया में छह महीने से अधिक का समय लग सकता है। इसके उपरांत पदों के आरक्षण का निर्धारण, बूथवार मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) का विखंडन, मतदान केंद्रों की भौतिक जांच व गठन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। यानी चुनाव की अंतिम डुगडुगी बजने में अभी लगभग एक वर्ष की प्रशासनिक प्रक्रियाएं बाकी हैं।