राकेश मिश्रा अररिया: स्वच्छता रैंकिग में भले ही अररिया जिले ने बेहतर अंक प्राप्त कर लिया है। मगर नप को अब भी जमीनी स्तर पर बहुत सुधार की आवश्यकता है तभी हम इंदौर की तरह साफ- सुथरे शहर की कल्पना कर सकते है। जिले में अभी भी बहुत सारी समस्या है जिसे जिलेवासियों को प्रतिदिन झेलना पड़ता है। नप के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल निस्तारण की है। हर साल बारिश के मौसम में शहर की लगभग सारे मोहल्ले में काफी सारा पानी जमा रहता है। जिससे गंदगी भी फैलती है। नप के द्वारा अस्थाई विकल्प चुनते हुए ऐसे कुछ जगहों पर मिट्टी गिराई जाती है। जो कीचड़ में तब्दील हो जाता है। और अधिकांश मोहल्ले कीचड़ से भरे पड़े हुए रहते है। अब ऐसे समय इंदौर शहर का सपना तो छोड़िए। लोगो को घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। गंदगी से सने सड़कों पर बच्चे- बूढ़े सभी चलते है। इतना ही नही लोगो के घरों में बारिश का पानी घुस जाता है। नप द्वारा फिलहाल इस समस्या के समाधान के लिए कोई माइक्रोप्लान नहीं है। हालांकि कुछ मोहल्ले में नाला निर्माण किया गया है। मगर निर्माण की रफ्तार काफी धीमी है और अधिकांश मोहल्ले में अभी नाला निर्माण कार्य आरंभ भी नहीं किया गया है। शहर के कुछ नालों को मास्टर नाले से जोड़ा गया है जिसके माध्यम से पानी का निस्तारण हो रहा है, लेकिन पूरे शहर में नाला निर्माण करना नप के लिए बड़ी चुनौती है जिसमे वो असफल दिख रहा है।

गांव- छोटे कस्बों में नही सार्वजनिक शौचालय- शहर में फिलहाल गिने- चुने ही सार्वजनिक शौचालय है। इसमें बस स्टैंड स्थित शोचालय की हालत खास्ता है। इसके अभाव में यात्रा करने वाले हजारों लोग सड़क किनारे ही गंदगी करते है। नप द्वारा इस शौचालय की सफाई भी कभी- कभी कराई जाती है। जिस कारण लोग इसमें जाने से परहे•ा करते है। शहर में तो फिर भी कुछ लोग सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था है मगर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में सार्वजनिक शौचालय खोजने से भी नही मिलते। कुछ जगह अगर है भी तो वो पूरी जीर्ण- शीर्ण अवस्था मे।

प्रमुख चौक- चौराहों पर भी नही है डस्टबिन: शहर के मुख्य भीड़ वाले इलाकों में चांदनी चौक, बस स्टैंड, •ाीरो माइल, एडीबी चौक आदि शामिल है। इन जगहों पर हजारों लोग प्रतिदिन जुटते है। मगर ऐसी जगहों पर भी डस्टबिन का अभाव है। लोग सड़कों पर कूड़ा फैकते है। जिस कारण काफी गंदगी फैलती है। शहर के बस स्टैंड में तो 10 ह•ार से अधिक लोग प्रतिदिन यात्रा करते है मगर ऐसे भीड़ वाले क्षेत्र में भी नप द्वारा डस्टबिन नह लगाया गया है। इसके अलावा नप द्वारा एक भी बोर्ड बैनर शहर में लगाकर ये अनुरोध नहीं किया गया है कि शहर में गंदगी न फैलाये। यहां तक शहर के पार्कों की सफाई भी शायद साल में एक बार ही कराने की जहमत नप द्वारा की जाती है।

बैन होने के बाबजूद प्लास्टिक से हो रही गंदगी- सरकार द्वारा प्लास्टिक पर बैन लगाया गया है। ये मानव जीवन के साथ- साथ पशु पक्षियों के लिए भी हानिकारक है। इसके बावजूद जिले में इसका धड़ल्ले से इसका उपयोग हो रहा है। लोग प्लास्टिक के रैपर आदि सड़को पर फैकते है। जिससे सबसे ज्यादा गंदगी फैलती है। कानून लागू होने के बाद नप द्वारा कुछ दुकानों पर प्लास्टिक उपयोग के कारण जुर्माना लगाया गया। मगर फिलहाल ये कानून जिले के अधिकारियों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे है। जिससे बेसुमार गंदगी फैल रही है। -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

इनसेट

लोगों को स्वच्छता के लिए कर रहे है जागरूक: चित्रगुप्त नगर निवासी आनंद रंजन उर्फ सुक्कु प्लास्टिक बैग का उपयोग नही करते और लोगों को भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक करते है। उनका कहना है कि इससे काफी गंदगी फैलती है। 10 समान लाने के लिए हमें 10 प्लास्टिक की जरूरत होती है। इससे अधिक गंदगी होती है साथ ही ये खतरनाक भी है। उनका कहना है कि शहर को साफ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है इसलिए हम सब को मिलजुलकर प्रयास करना चाहिए।

Edited By: Jagran