संसू, फारबिसगंज (अररिया): इंद्रधनुष साहित्य परिषद् के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय प्रोफेसर कालोनी में साहित्यकार द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की जयंती आयोजित की गई। बाल साहित्यकार हेमन्त यादव शशि की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन विनोद कुमार तिवारी ने किया।

माहेश्वरी के तेैल चित्र पर साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों के द्वारा श्रद्धासुमन अर्पण के बाद शशि एवं प्रधानाध्यापक हर्ष नारायण दास ने कहा कि कवि द्वारिका प्रसाद का जन्म एक दिसम्बर 1916 को आगरा के रौहता नामक गांव में हुआ था। बाल्यावस्था से हीं वे मेधावी और अन्यत्त्म थे । राष्ट्र के भावी भविष्य की नौका को गति देने के उद्देश्य से उन्होंने बाल साहित्य का अवलंबन लिया और लगभग 50 वर्ष तक रोचकता की चाशनी में बालकों को नैतिक मूल्य और मानवता का पाठ परोसते रहे। उन्होंने कई अदभूत और अभूतपूर्व रचनाएं की, जिनमें जिसने सूरज चांद बनाया, हम सब सुमन एक उपवन के, इतने ऊंचे उठो कि जितना ऊंचा गगन है प्रमुख हैं। हिन्दी सेवी अरविद ठाकुर एवं विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। बच्चों को उनकी रचनाओं से वह शिक्षा मिलती है जो आचरण में लाई जा सके। उन्हें ढेरों पुरस्कार मिले किन्तु सही मायने में वे स्वयं साहित्य जगत हेतु एक अछ्वुत पुरस्कार थे। कहा वे बच्चों के सच्चे शुभचितक थे।

इस अवसर पर वरिष्ठ लोकप्रिय कवि सुरेश कंठ, दिलीप समदर्शी और सुनील दास के द्वारा एक एक कविता और गजलें प्रस्तुत किया गया। जयंती कार्यक्रम में उपरोक्त के अलावा शिवनारायण चौधरी, श्यामानंद यादव, पलकधारी मंडल, मनीष राज, सीताराम बिहारी आदि भी उपस्थित थे।

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