संसू, फारबिसगंज (अररिया): शनिवार को प्रोफेसर कालोनी स्थित द्विजदेनी प्रांगण में इंद्रधनुष साहित्य परिषद् के द्वारा पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी जी की जयंती विचार गोष्ठी के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल साहित्यकार हेमंत यादव शशि ने की। विचार गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों ने सर्वप्रथम द्विजदेनी जी के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। तत्पश्चात द्विजदेनी जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए अपने अपने विचार प्रकट किए ।

हेमंत यादव ने बताया कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, आशु कवि, नाटककार एवं हितैषी पत्रिका के संपादक पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी जी का जन्म 15 जनवरी 1885 को सारण में हुआ था। बचपन में ही वे काम की तलाश में घर छोड़ कर फारबिसगंज चले आए थे। फिर यहां से वे भरगामा प्रखंड के सिमरबनी ग्राम में रहने लगे। उन दिनों देश भर में स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। नवयुवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने के लिए उन्होंने सिमरबनी गांव में नाट्य परिषद् की स्थापना की और अपने लिखे नाटकों के जरिए लोगों को आजादी की लड़ाई लड़ने को प्रेरित किया।

सुरेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि द्विजदेनी जी के नाम से यहां एक स्कूल जरूर है, लेकिन स्कूल में उनकी प्रतिमा नहीं है। इस स्कूल में उनकी एक प्रतिमा लगनी चाहिए। वहीं प्रअ हर्ष नारायण दास और प्रोफेसर सुधीर सागर ने अपने संबोधन में कहा कि द्विजदेनी जी ने प्रचुर मात्रा में साहित्य सृजन किया था, जिनमें नाटक, कहानी, व्यंग्य, गजल आदि प्रमुख हैं। उनकी रचनाओं में देशभक्ति प्रमुखता से होती थी।

वहीं विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि द्विजदेनी जी ने 1918 ईस्वी में हितैषी पत्रिका का प्रकाशन और संपादन किया था। हितैषी मारिशस, फिजी, सूरीनाम आदि देशों में भी पढ़ी जाती थी। कहा अर्थाभाव के कारण यह पत्रिका दो या तीन अंक ही निकल पाई थी। इस मौके पर गजलकार दिलीप समदर्शी तथा सुनील दास ने अपने लिखी गजल और गीत सुनाए।

कार्यक्रम में उपरोक्त के अलावा प्रेमलाल पाठक, अरविद ठाकुर, मनोज तिवारी, संजय तिवारी आदि भी उपस्थित थे।

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