संसु, सिकटी (अररिया): सीमावर्ती प्रखंड क्षेत्र के कुआड़ी स्थित शिव मंदिर के समीप नवनिर्मित संतमत सत्संग मंदिर के प्रांगण में दो दिवसीय संतमत सत्संग का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इस दौरान भागलपुर के कुप्पा घाट से आए महर्षि मेंहीं के परम शिष्य स्वामी विभूतिजी महाराज व उनके सहयोगियों ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस संसार में गुरु का स्थान सबसे आदरणीय है। स्वामी विभूतिजी महाराज ने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं है। सत्संग होने से मानव में आयी विकृतियां अपने आप दूर हो जाती है। सत्संग के माध्यम से समाज में एकजुटता आती है। उन्होंने कहा कि गुरु का नाम जपने मात्र से ही तमाम पापों का नाश हो जाता है। अगर भक्त अपने गुरु की पूजा सच्चे मन से करें तो उनका उद्धार हो जाता है। वहीं बाबा ने कहा कि माया ही संसार की रचना करती है व व्यक्ति को उसके श्रोत अर्थात ब्रह्म के प्रति अज्ञानी बना देती है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति जन्म लेता है तो वह अपने नाम रूप के कारण स्वयं को ईश्वर का अंश नहीं मानता है, बल्कि उसे अपने वाह्य रूप का अभिमान हो जाता है। वह अपना एक व्यक्तित्व रच लेता है। उसकी सोच सीमित हो जाती है। सत्य का ज्ञान हो जाने पर व्यक्तित्व का विनाश हो जाता है। तब व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं स्वामीजी ने कहा कि सृष्टि के पूर्व, वर्तमान व भविष्य में केवल उन्हीं का अस्तित्व विद्यमान रहता है। ईश्वर सतरूप होते हुए भी सत्य से परे हैं। प्रवचन के दौरान शनिवार की सुबह कार्यक्रम में स्वामीजी महाराज ने रामचरितमानस के अयोध्या कांड से बड़ा ही मार्मिक कथा का विमोचन किया।केंद्रीय वार्षिक अधिवेशन में प्रवचन व विशाल भंडारे का कार्यक्रम रखा गया है। सत्संग में काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर आयोजित भंडारे में दूर-दूर के गांवों के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। सत्संग को आत्मसात करने के लिए भारतीय क्षेत्र के अलावा नेपाल दूर -दराज के श्रद्धालुओं ने भी बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मौके पर वरिष्ठ सत्संगी कृष्ण चंद्र गुप्ता,भानु प्रताप गुप्ता, प्रमोद साह, प्रदीप साह, विश्वनाथ सिंह, दीपचंद पोद्दार, भागवत ठाकुर, गुलाबचंद सिंह, रमेश पासवान, गणेश पोद्दार, रामकृष्ण बाबा सहित कई कार्यकर्ताओं के अलावा हजारों श्रद्धालु मौजूद थे।

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