- कार्यक्रम के लिए राज्य के पांच अति महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल है अररिया। - पिरामल स्वास्थ्य, यूनीसेफ, पीएमसीएच और केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा मिलकर देंगे सहयोग।

संवाद सूत्र अररिया: जिले में अब कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल की जायेगी और कुपोषण को दूर किया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा पांच जिलो में कुपोषण दूर करने के लिए संवर्धन योजना चलाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिसमे अररिया जिले को भी अति महत्वकांक्षी जिले में शामिल किया गया है। दरअसल कोरोना महामारी ने लोगों के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित किया है। एक तरफ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में चुनौतियां बढ़ी तो दूसरी तरफ कोरोना के कारण गरीब तबके के लोगों की आर्थिक स्थिति भी खराब हुई जिसके कारण गरीब परिवारों में बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी। एक अनुमान के अनुसार कोरोना के कारण कुपोषण लगभग 15 फीसद बढ़ने की आशंका जताई गयी है। इन विपरीत परिस्थितियों में अति गंभीर कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल की जरूरत बढ़ी है जिसे अब संवर्धन कार्यक्रम के तहत सुधारने की पहल की जा रही है। राज्य के पांच महत्वकांक्षी जिलों में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है जिसमें अररिया भी शामिल है।

पोषण अभियान की नोडल पादधिकारी श्वेता सहाय ने कहा कि अति गंभीर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भेजा जाता है। लेकिन एक अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि केवल 10-15 फीसद ही अति-गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भेजने की जरूरत है वहीं लगभग 90 फीसद बच्चे समुदाय आधारित देखभाल से ही स्वस्थ हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए संवर्धन कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है जिसमें अति गंभीर कुपोषित बच्चों को समुदाय आधारित देखभाल प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वेस्टिग लंबाई के अनुसार वजन की पहचान, रोकथाम, प्रबन्धन और बच्चों के भोजन की गुणवत्ता को बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के तहत 6 माह से 59 माह के बच्चों को लाभ मिलेगा।

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कई राज्य स्तरीय संस्था का मिलेगा सहयोग- संवर्धन कार्यक्रम को स़फल बनाने के लिए आइसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य करेंगे। स्वास्थ्य विभाग दवाओं की उपलब्धता, वीएचएसएनडी सत्र पर अति गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना एवं एनआरसी से छुटे बच्चों को समुदाय आधारित देखभाल से जोड़ने का कार्य करेगी। आइसीडीएस शत प्रतिशत बच्चों की स्क्रीनिग, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वृद्धि निगरानी उपकरणों की उपलब्धता, टीएचआर का वितरण एवं घर पर उर्जायुक्त भोजन बनाये जाने को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को करेगी। डीपीएम स्वास्थ्य रेहान असरफ ने बताया कि संवर्धन कार्यक्रम को सफल बनाने में पिरामल स्वास्थ्य, यूनिसेफ, पीएमसीएच डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं नेशनल सेंटर ऑ़फ एक्सीलेंस सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवर्धन कार्यक्रम 5 चरणों में आगे बढ़ेगा जिसमें कार्यक्रम का जिला स्तरीय शुभारंभ, क्षमतावर्धन प्रशिक्षण, दवाओं एवं लोजिस्टिक्स की व्यवस्था, चयनित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कार्यक्रम का क्रियान्वयन तथा कार्यक्रम का पर्यवेक्षण, रिपोर्टिंग एवं समीक्षा शामिल होंगे। अगले चरण में महिला पर्यवेक्षिका, पोषण अभियान के प्रखंड समन्वयक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक एवं आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।

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स्थिति के आकलन से आरोग्य दिवस तक का होगा आयोजन- संवर्धन कार्यक्रम को कुल 10 चरणों में संपादित किया जाएगा। जिसमें सामुदायिक मोबिलाईजेशन एवं सभी बच्चों की पोषण स्थिति का आंकलन, चिकित्सीय जांच, भूख की जांच, अति गंभीर कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के तरीके, दवाइयां, पोषण, पोषण -स्वास्थ्य शिक्षा, संवर्धन कार्यक्रम के दौरान पोषण की निगरानी, संवर्धन कार्यक्रम से छुट्टी देने के बाद फोलोअप शामिल है। समुदाय आधारित देखभाल को मजबूती देने के लिए आरोग्य दिवस, घर पर बच्चों की देखभाल एवं गृह भ्रमण में सेविका एवं आशा द्वारा दी जाने वाली परामर्श को मजबूत किया जाएगा।