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बिहार में GPS और मोबाइल ऐप से तय होंगी पंचायतों की नई सीमाएं, अररिया के 61 गांवों की डिजिटल मैपिंग पूरी

Published: Sat, 12 Sep 2026 03:54 PM (IST)

आगामी पंचायत चुनाव के लिए नरपतगंज प्रखंड की पंचायतों के परिसीमन हेतु डिजिटल मैपिंग का कार्य पूरा हो गया है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. आगामी पंचायत चुनाव हेतु नरपतगंज में डिजिटल मैपिंग पूर्ण।

  2. 61 राजस्व गांवों व टोलों का जीपीएस से सर्वे हुआ।

  3. परिसीमन और क्षेत्र निर्धारण में मिलेगी सटीक मदद।

संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। आगामी पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश के आलोक में नरपतगंज प्रखंड की पंचायतों के परिसीमन को लेकर डिजिटल मैपिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है।

प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 61 राजस्व गांवों एवं टोलों की भौगोलिक स्थिति का डिजिटल सर्वे मोबाइल एप और जीपीएस के माध्यम से करते हुए संबंधित आंकड़ों को शत-प्रतिशत ऑनलाइन दर्ज किया गया।

डिजिटल मैपिंग के तहत प्रत्येक राजस्व गांव एवं टोले की वास्तविक भौगोलिक स्थिति, अक्षांश-देशांतर (लैटीट्यूड-लान्गीट्यूड) तथा क्षेत्र की सीमाओं से संबंधित जरूरी आंकड़े ऑनलाइन दर्ज किए गए हैं। ॉ

इस प्रक्रिया के पूरा होने से संबंधित गांव एवं टोले का डिजिटल भौगोलिक रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा। इससे आगामी पंचायत चुनाव के लिए पंचायतों के परिसीमन एवं क्षेत्र निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।

बताया गया कि डिजिटल मैपिंग में प्रत्येक गांव या टोले के लिए अलग-अलग लोकेशन प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। इसमें उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम दिशा के अलावा मध्य भाग तथा उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम दिशा के चारों कोनों को भी चिह्नित किया गया है।

जीपीएस से इन सभी स्थानों की वास्तविक लोकेशन दर्ज की गई है। इससे किसी गांव या टोले के भौगोलिक विस्तार और उसकी स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

परिसीमन में डिजिटल रिकॉर्ड होगा महत्वपूर्ण

आगामी पंचायत चुनाव को लेकर संभावित परिसीमन एवं आरक्षण रोस्टर में बदलाव की चर्चाओं के बीच डिजिटल मैपिंग को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिजिटल रूप से दर्ज किए गए आंकड़ों के आधार पर पंचायतों एवं संबंधित क्षेत्रों की सीमाओं को निर्धारित करने में प्रशासन को सहूलियत होगी। इससे क्षेत्र की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को रिकॉर्ड के आधार पर समझने में मदद मिलेगी।

वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही चुनावी तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची, आरक्षण, क्षेत्र निर्धारण एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं से संबंधित तैयारियां चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जानी हैं।

इसी क्रम में परिसीमन से जुड़े डिजिटल आंकड़ों का संकलन किया गया है। डिजिटल मैपिंग से भविष्य में किसी पंचायत, राजस्व गांव अथवा टोले की सीमा को लेकर होने वाली स्थिति को स्पष्ट करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

पुराने भौतिक रिकॉर्ड के साथ डिजिटल लोकेशन डेटा उपलब्ध रहने से संबंधित क्षेत्रों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान होगी।

शत-प्रतिशत ऑनलाइन दर्ज हुआ डेटा

नरपतगंज बीडीओ अजीत कुमार ने बताया कि  राज्य निर्वाचन आयोग एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश के आलोक में प्रखंड क्षेत्र के पंचायतों के परिसीमन को लेकर डिजिटल मैपिंग का कार्य हुआ है। ॉ

मोबाइल एप एवं जीपीएस से 61 राजस्व गांवों एवं टोलों की डिजिटल मैपिंग कर उससे संबंधित डेटा शत-प्रतिशत ऑनलाइन दर्ज कर लिया गया है।

मैपिंग के दौरान संबंधित गांव एवं टोले की भौगोलिक स्थिति, लोकेशन प्वाइंट, अक्षांश-देशांतर सहित निर्धारित दिशा के बिंदुओं को रिकॉर्ड किया गया है। इससे आगामी पंचायत चुनाव के दौरान परिसीमन से संबंधित कार्यों को पूरा करने में प्रशासन को आवश्यक डिजिटल आधार उपलब्ध होगा।

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