- कोरोना संक्रमित पांच प्रतिशत मरीजों की होगी ओमिक्रान जांच

- आरटीपीसीआर जांच में सीटी वैल्यू 25 या इससे कम होने पर जीनोम सिक्वेंसिग का प्रावधान

जागरण संवाददाता, अररिया : ओमीक्रान के खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। जांच व उपचार के दायरे बढ़ाए गए हैं। यह बातें सीएस डा. विधानचंद्र सिंह ने शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि जिले में कोरोना संक्रमण का मामला तेजी से बढ़ रहा है। नये वैरिएंट ओमिक्रान की तीव्र प्रसार की संभावना है। इसलिए विशेष सतर्कता भी बरती जा रही है।

नये वैरिएंट की पहचान कर प्रसार को नियंत्रित करने का प्रयास जारी किया है।

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जांच की सुविधा उपलब्ध :

सीएस ने कहा कि जिले में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा उपलब्ध है। संक्रमित व्यक्तियों को आरटीपीसीआर जांच के लिए दूसरे जिले में रोगियों की जाने की आवश्यकता नहीं है। अब यहां संक्रमण के गंभीर मामलों का पता लगाना आसान हो गया है। इसकी मदद से बिना किसी लक्षण वाले मरीजों में भी संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।

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नए वैरिएंट की नहीं होगी पहचान:

जानकार बताते हैं कि आरटीपीसीआर जांच के जरिये भी कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रान का पता नहीं लगाया जा सकता है। लिहाजा ओमिक्रान से संबंधित मामलों का पता लगाने के लिए नई व्यवस्था पर अमल किया जा रहा है।

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जीनोम सिक्वेंसिग जरूरी :

सदर अस्पताल के आरटीपीसीआर लैब में कार्यरत मेडिकल माइक्रोबायोलोजिस्ट डा. धीरत कुमार बताते हैं कि आरटीपीसीआर यानि रियल टाइम पोलिमर्स चेन रिएक्शन एक आण्विक परीक्षण है। जो आपके श्वसन नली के ऊपरी नमूनों का विश्लेषण करता है। यह कोरोना का कारण बनने वाले वायरस के अनुवांशिक सामग्री की खोज करता है। इससे संक्रमण का पता आसानी से चल जाता है। लेकिन किसी वायरस के नये वैरिएंट का पता लगाने के लिये जीनोम सिक्वेंसिग स्टडी जरूरी होता है। सभी संक्रमित सैंपल के नमूनों को जीनोम सिक्वेंसिग के लिए नहीं भेजा जा सकता है। यह प्रक्रिया बेहद जटिल, धीमा व महंगा है।

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ओमिक्रान जांच के लिए जिले से भेजे गये 10 सैंपल :

मेडिकल माइक्रोबायोलोजिस्ट श्री कुमार के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने ओमिक्रान वैरिएंट की जानकारी प्राप्त करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके मुताबिक आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित पाये गए वैसे मरीज जिनका सीटी वैल्यू 22 से 25 या इससे कम है। वैसे लोगों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिग के लिये आईजीएमएस पटना भेजा जाना है। आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित महज पांच प्रतिशत मरीजों का सैंपल जीनोम सिक्वेंसिग के लिये भेजा जाना है। बताया कि जिले से अब तक 10 सैंपल जीनोम सिक्वेंसिग के लिये पटना भेजा गया है। औसतन जिले में हर दिन दो हजार से अधिक से लोगों की आरटीपीसीआर जांच हो रही है। बीते कुछ दिनों से जांच में पाजिटिविटी रेट में इजाफा देखा जा रहा है। औसतन हर दिन 20 से 25 संक्रमित मरीज मिल रहे हैं

सीटी वैल्यू वायरस को मापने का पैमाना :

सिविल सर्जन ने बताया कि कोरोना वायरस का पता लगाने के लिये सीटी यानि साइकिल थ्रेशहोल्ड का पता लगाना जरूरी है। जो वायरस को जांचने का एक पैमाना है। इसे विशेषज्ञों ने तय किया गया है। सीटी काउंट के आधार पर ही टेस्ट रिपोर्ट का पाजिटिव व निगेटिव होना तय होता है। सीटी वैल्यू कोरोना वायरस के संक्रमण की जानकारी देता है। सीटी वैल्यू कम होने का मतलब मरीज की स्थिति का गंभीर होना है। सीटी वैल्यू अधिक होने पर संक्रमण के प्रभाव को सामान्य माना जाता है।

Edited By: Jagran