संवाद सूत्र, फारबिसगंज (अररिया): फारबिसगंज के तेरापंथ भवन परिसर में रविवार को जैन धर्म की साध्वी डा. पीयूष प्रभा के समक्ष अनुयायियों के द्वारा अनुव्रत उद्धबोधन सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रुप में ओम शांति की बहन सीता दीदी, दधिचि देहदान समिति के जिलाध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल, सचिव पूनम पांडिया, दिल्ली कोर्ट की अधिवक्ता जयंती बहन, सिलीगुड़ी के पूर्व वरिष्ठ अणुव्रत पदाधिकारी तोलाराम सेठिया शामिल हुए। कार्यक्रम की शुभ शुरुआत अणुव्रत समिति की बहनों द्वारा मंगलाचरण के रूप में अणुव्रत गीत के साथ किया गया। अणुव्रत समिति की अध्यक्षा प्रभा सेठिया द्वारा आगंतुकों का स्वागत किया गया। उन्होंने वर्तमान समय में अणुव्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और इसके नियम को अपनाने के लिए जन-जन को प्रेरणा दी। दधीचि देहदान समिति के सचिव पूनम पांडिया ने कहा अणुव्रत मानवता के साथ हमें जोड़ता है। इस अवसर पर बिहार से चुने गए यूपीएससी सफल छात्रों को मंच से बधाइयां दी। ओम शांति की दीदी सीता ने कहा कि संयम और सादगी से बहुत प्रेरणा मिलती है। साध्वी श्री को इंगित करते हुए उन्होंने कहा त्याग का पथ कठिन है पर शांति से भरा है व्यक्ति शांति से जीवन जिए और दूसरों को भी शांति से जीवन जीने दे। अपने प्रवचन में साध्वी डा. पीयूष प्रभा ने कहा कि जीवन में तीन रत्न है अन्न जल और सुभाषित। इन रत्नों में भी सुभाषित यानि अच्छे वचन जिनके पास है वह इंसान मानवता का पाठ भी पढ सकता है और दूसरों को भी पढ़ा सकता है। सांप्रदायिक सौहार्द के विषय पर चर्चा करते हुए साध्वी ने कहा कि एक दूसरे की भावना का सम्मान करें। साध्वी सुधा कुमारी ने सूमधुर गीतिका द्वारा अणुव्रत के भावों को प्रकट किया। साध्वी भावना कुमारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अणुव्रत मानव को सच्चा मानव बनाता है। अहिसा सछ्वावना और शांति के लिए अणुव्रत बहुत ही जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन कल्पना सेठिया ने किया तथा आभार ज्ञापन समिति की मंत्री नीलम बोथरा ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों को सम्मानित करते हुए तथा बाहर से पधारे हुए सिलीगुड़ी के अणुव्रत समिति के प्रचारक प्रचारक को तथा ज्ञानशाला के बच्चों के तप अभिनंदन के रूप में दालकोला के ज्ञानशाला के दो बच्चों को सम्मानित किया गया। सम्मान के क्रम में अणुव्रत समिति की अध्यक्षाप्रभा सेठिया, महिला मंडल अध्यक्षा कुसुम भंसाली, सभा के अध्यक्ष निर्मल जी मरोठी, सभा के मंत्री सुमन डागा, अणुव्रत समिति के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी तोलाराम सेठिया की मुख्य भूमिका रही।

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