संसू,सिकटी(अररिया):- बाढ़ एक बार क्या आई आज तक जाने का नाम नहीं लिया। विगत मई माह में नूना नदी के नये धारा से आया सैलाब पड़रिया के राजवंशी टोले के दर्जनों परिवार के दरवाजे आंगन में आज तक कायम है। यह तीन माह में आठ बार नदी में बाढ़ आई और चली गई, लेकिन इन परिवारों के लिए यूं कहा जाय कि बाढ़ के पानी ने अपना बसेरा बना डाला है। इस हालत में जीना अब इन परिवारों की नियति बन चुकी है। नूना नदी की नई धारा से लगातार बह रहे पानी के कारण प्रखंड के पड़रिया पंचायत में कचना राजबंशी टोला में कई परिवार के आंगन दरवाजे पर गत माह मई से पानी लगा हुआ है। ये लोग ऐसी हालत में अब जीने के लिए आदी हो चुके हैं। यह ऐसा गांव है, जहां विगत मई माह में जब पहली बार नूना नदी में बाढ़ आयी थी तब से इस गांव के एक दर्जन परिवार ऐसे भी है जिनके घर आंगन से बाढ़ का पानी एक बार घुसने के बाद आज तक निकला ही नहीं। सभी परिवार तीन महीने से ऐसे ही जी रहे हैं।जो बाढ़ की प्रशासनिक परिभाषा के कई गुना उपर है। जिसमें तीन दिनों तक लगातार पानी लगे रहने को ही बाढ़ माना जाता है। प्रशासन के लिए यह एक सामान्य घटना है। जिलाधिकारी के क्षेत्र भ्रमण के क्रम में इन परिवारों की महिलाओं ने अपनी दशा की व्यथा सुनाने का भरसक प्रयास भी किया। लेकिन वो अनसुने ही चले गए। प्राप्त जानकारी अनुसार जब नूना की स्थिति सामान्य भी होती है,तब भी इन परिवारों के घर आंगन में चार से पांच फीट पानी बरकरार रहता है,और आज भी बरकरार है।वार्ड चार कचना राजबंशी टोला के जय नाथ सिंह,धर्मेंद्र कुमार सिंह,बाबुल कुमार सिंह,गंगा प्रसाद सिंह,मदन मोहन सिंह, धर्मवीर सिंह, राज कुमार सिंह, उमेश सिंह,जितेन्द्र सिंह,महेंद्र सिंह और आशिक सिंह की एक जैसी व्यथा है।सभी परिवारों के घर आंगन मे विगत मई माह में आई बाढ़ के बाद से ही आंगन दरवाजे पर लगातार दो तीन पानी बरकरार है।जब जब पानी और बढ़ जाता है तो घर में भी घुस जाता है।तब ये विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हो जाते है।चापाकल पानी मे डुबा पड़ा है। दूसरे के घर पानी लाकर उपयोग करने को विवश है।

परंतु प्रशासन द्वारा इनकी कोई मदद नही किया गया।केवल तीन मीटर प्लास्टिक देकर इति श्री कर ली।जबकि इन परिवारों को ग्रामीणों ने सहयोग का हाथ बढ़ाया जिससे ये विस्थापित होते हुए भी अपनों के साथ जीवन यापन कर रहे है।अब इनके सामने समस्या मुंह बाए खाड़ी है।इनके समूचे खेत खलिहान बाढ़ में पानी के साथ बह कर आये गाद व बालू भर जाने के कारण उपजाऊ नही रह गए हैं।कब तक लोगों के मदद के भरोसे जिदगी कटेगी।आगे की समस्या विकराल है। कल तक जो दाता थे,आज याचक हो दूसरो की दया पर निर्भर हो गए हैं।इन्हे नियति क्या से क्या समय दिखला रही है।स्थानीय पूर्व उप प्रमुख कृष्णा सिंह, शिक्षक रागिब अनबर,मो. मुजफ्फर हुसैन,रमी•ा अहसन,पिकू सहित दूसरे ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचायत के इस टोले के ये परिवार की हालत सबसे खराब है।तीन माह से पानी लगा है।जिसमे बदतर जीवन जी रहे हैं।जब तक नदी की धारा बहती रहेगी तब तक यही हालत बनी रहेगी।

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