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सावधान! नकली मावा और सिंथेटिक दूध से बन रही मिठाइयां, अररिया में डॉक्टरों ने दी फूड पॉइजनिंग की चेतावनी

Published: Sun, 23 Aug 2026 04:20 PM (IST)

रक्षाबंधन नजदीक आते ही अररिया के नरपतगंज क्षेत्र में मिलावटी और सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री को लेकर चिंता बढ़ गई है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. रक्षाबंधन पर नरपतगंज में मिठाइयों की मांग बढ़ी।

  2. मिलावटी और सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री से चिंता।

  3. खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच व कार्रवाई की मांग।

संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय सहित फुलकाहा, घुरना और बसमतिया क्षेत्र के बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ गई है।

त्योहार को लेकर जहां मिठाई दुकानदारों ने बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में मिलावटी, बासी और सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित जांच नहीं होने के कारण कई दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी रोक-टोक के संदिग्ध गुणवत्ता वाली मिठाइयां बेच रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि चमकदार और आकर्षक पैकिंग में सजी मिठाइयां देखने में भले ही लुभावनी लगती हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

त्योहारों के दौरान महानगरों और दूसरे स्थानों से भी बड़ी मात्रा में तैयार मिठाइयां मंगाए जाने की बात सामने आती रही है। सस्ती होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लोग ऐसी मिठाइयों की ओर आकर्षित होते हैं। इससे मिलावटखोरी का कारोबार बढ़ने की आशंका रहती है।

जांच के अभाव में बढ़ रहा मिलावट का खेल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नरपतगंज के ग्रामीण एवं सीमावर्ती बाजारों में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नियमित रूप से मिठाई दुकानों की जांच नहीं की जाती।

दुकानों में मिठाइयों की गुणवत्ता, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, साफ-सफाई, पैकेजिंग और रख-रखाव की जांच नहीं होने से मिलावटखोरों को खुली छूट मिल रही है। लोगों ने अररिया जिला प्रशासन से त्योहार के मद्देनजर विशेष जांच अभियान चलाने और दोषी दुकानदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

रक्षाबंधन पर मिलावट का बढ़ता बाजार

रक्षाबंधन के अवसर पर मिठाइयों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाकर कुछ कारोबारी अधिक मुनाफे के लिए घटिया या मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं।

बाजार में जहां काजू कतली, गुलाबजामुन, रसगुल्ला सहित कई तरह की मिठाइयां उपलब्ध हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों की पैक मिठाइयां भी दुकानों पर पहुंच चुकी हैं।

दूसरी ओर सरसों तेल, डालडा, घी, बेसन, सत्तू और आटा समेत विभिन्न खाद्य सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि का असर भी मिठाई बाजार पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में कम लागत में मिठाई तैयार कर अधिक मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना जरूरी है।

इस तरह तैयार किए जाने का दावा

स्थानीय स्तर पर मिलावट को लेकर लोगों में चर्चा है कि सिंथेटिक दूध तैयार करने में यूरिया, डिटर्जेंट, रिफाइंड और अन्य रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें मिलती हैं।

इसी प्रकार नकली मावा तैयार करने में सिंथेटिक दूध के साथ सूजी, तेल, रंग, आलू और शकरकंद जैसी सामग्री मिलाए जाने की बात कही जाती है।

हालांकि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है और इसकी पुष्टि केवल अधिकृत जांच के बाद ही की जा सकती है।

मिलावटी मिठाई से स्वास्थ्य पर खतरा

चिकित्सक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि दूषित या मिलावटी मिठाइयों के सेवन से फूड प्वाइजनिंग, जी मिचलाना, बेचैनी, चक्कर, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अखाद्य या हानिकारक रासायनिक पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।

इसलिए त्योहारों के दौरान लोगों को मिठाई खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, ताजगी, पैकिंग, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा दुकान की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से रक्षाबंधन को देखते हुए नरपतगंज, फुलकाहा, घुरना और बसमतिया बाजारों में विशेष अभियान चलाकर मिठाई दुकानों से नमूने लेने, उनकी जांच कराने तथा मानक के विपरीत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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