अनंत चतुर्दशी: 14 गांठों वाले पवित्र रक्षासूत्र से दूर होंगे संकट, चौदह लोकों के प्रतीक श्रीहरि की होती है पूजा
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के साथ ...और पढ़ें

अनंत चतुर्दशी
HighLights
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को शुभ योग में मनाई जाएगी।
भगवान विष्णु, गौरी, गणेश की पूजा और अनंत सूत्र धारण।
14 गांठों वाला सूत्र संकटों से रक्षा करता है, पौराणिक महत्व।
संवाद सूत्र, सिकटी (अररिया)। सीमावर्ती प्रखंड क्षेत्र में अनंत चतुर्दशी श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाने वाला पवित्र अनन्त चतुर्दशी पर्व 25 सितंबर को मनाया जाएगा। सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के अत्यंत शुभ संयोग में इस वर्ष यह त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता गौरी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश के पूजन की विशेष परंपरा रही है।
धर्मग्रंथों में इस व्रत एवं पूजन का विशेष फल बताया गया है। श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में कलश स्थापित करते हैं। अष्टदल कमल के समान बर्तन में कुश (एक विशेष घास) से बने भगवान अनंत की प्रतिकृति तैयार कर स्थापित की जाती है।
14 गांठों वाला पवित्र अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त सुबह 8:35 बजे से शुरू होकर शाम 4:10 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन कर सकेंगे। पूजन संपन्न होने के पश्चात 14 गांठों वाला पवित्र अनंत सूत्र धारण करने की सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाएगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार 14 गांठों वाला यह अनंत सूत्र जीवन में आने वाले सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करता है। पुरुष इस रक्षासूत्र को अपनी दाहिनी बांह पर और महिलाएं बाईं बांह पर धारण करती हैं।
14 गांठें चौदह लोकों का प्रतीक
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ये 14 गांठें चौदह लोकों का प्रतीक हैं, जिन्हें स्वयं भगवान विष्णु का रूप मानकर धारण किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हारकर वन-वन भटक रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें यह व्रत करने का सुझाव दिया था।
पांडवों ने विधि-विधान से व्रत रखकर अनंत सूत्र धारण किया था, जिसके बाद उनके सभी कष्ट दूर हो गए थे। इस दिन शेषनाग की शैया पर विराजमान श्रीहरि की पूजा की जाती है।
