नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। टोयोटा मोटर्स ने हाल ही में कार बाजार के बी-हाई वर्ग में प्रवेश कर अपने बाजार को विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। घरेलू बाजार के लिए कंपनी की क्या रणनीति होगी, इस पर टोयोटा किलरेस्कर के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर एन. राजा ने दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख नितिन प्रधान से बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

भारतीय बाजार के लिए कंपनी की रणनीति क्या है?

हमारी रणनीति तीन बिंदुओं पर आधारित है। पहला ‘सिटी ऑफ टुमारो’ यानी शहरों में आने वाले कल के लिए मोबिलिटी के क्या विकल्प होंगे। दूसरा, मौजूदा उत्पाद और तीसरा फ्यूचर। मुख्यत: हमारा भरोसा फ्यूचर टेक्नोलॉजी में है, जो इन तीनों बिंदुओं के लिहाज से अहम है। आने वाला कल इलेक्टिक कारों का है। इसकी कीमत, ग्राहकों की प्राथमिकता और देश में उपलब्ध आवश्यक बुनियादी ढांचा इसका भविष्य तय करेंगे।

मौजूदा उत्पादों को लेकर आपकी क्या योजना है?

इसी एक्सपो में टोयोटा ने एक नया मॉडल यारिस पेश किया है। इसके जरिये हमने कोरोला और इटियोस के बीच के अंतर को भरने की कोशिश की है। हमारे उत्पादों के लिहाज से यह अंतर काफी अधिक था। इसलिए यारिस को पेश किया गया। विश्व स्तर की यह सेडान उन्नत होने के साथ-साथ काफी आरामदेह है। इस मॉडल को इसकी पांच स्पष्ट विशेषताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली है। ये विशेषताएं उन्नत और भावनात्मक डिजाइन, लक्जरी, सफर की उत्कृष्ट गुणवत्ता और शांति, डायनेमिक कार्यकुशलता और अपनी श्रेणी में सुरक्षा और टेक्नोलॉजी हैं।

भारतीय ग्राहक को भविष्य में क्या देंगे?

देखिए, टोयोटा भारत में एक नए मोटरिंग अनुभव की शुरुआत कर रही है। यारिस के साथ इसकी शुरुआत हुई है। यारिस को हम एक ऐसे मॉडल के तौर पर देख रहे हैं, जो देश में टोयोटा ब्रांड के लिए नए ग्राहक बनाएगा। हमारा फोकस एक खास, उत्कृष्ट कार बनाने पर रहा है, जिसमें सहज अनुभूति वाले फंक्शन रहें और यह अगली पीढ़ी के बी-हाई वर्ग का नेतृत्व करेगा।

टोयोटा की इलेक्टिक कार भारतीय बाजार में कब आएगी?

अभी हम कैमरी के जरिये हाईब्रिड सेगमेंट में हैं। हमारा मानना है कि भारतीय बाजार में अभी ग्राहक की प्राथमिकता इलेक्टिक कार को लेकर नहीं है। कीमत के लिहाज से देखें तो वह अभी भी पेट्रोल-डीजल या फिर हाईब्रिड कारों को ही पसंद कर रहा है। हमारा मानना है कि ग्राहकों को इलेक्टिक कारों की तरफ मोड़ने में अभी वक्त लगेगा। इससे पहले सरकार को इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा।

By Shubham Shankdhar