नई दिल्ली (ऑटो डेस्क)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की चार सदसीय कमेटी ने जर्मन की कार निर्माता कंपनी Volkswagen पर गलत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर 171.34 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।

कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक Volkswagen की कारों से साल 2016 में लगभग 48.678 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) दील्ली की हवा में घुली है और इस हवा से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान की अनुमानित राशि 171.34 करोड़ रुपये है। यह कीमत रूढ़िवादी भी मानी जा सकती है, ऐसा इसलिए क्योंकि फिलहाल ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं आई है जिससे नाईट्रोजन ऑक्साइड से वातावरण को हुए नुकसान को मापा जा सके।

बता दें दिल्ली में वायु प्रदूषण से हुई कुल स्वास्थ्य हानि की अनुमानित राशि 157.80 करोड़ रुपये है और यह जुर्माना 2016 से 2018 तक के लिए लगाया गया है, जिससे यह राशि बढ़कर 171.34 करोड़ रुपये हो जाती है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के अधिक समय तक संपर्क में लेने पर अस्थमा जैसे रोग तो होते ही हैं साथ ही सांस लेने संबंधि इंफेक्शन होने की अशंका अधिक बढ़ जाती है।

वर्ष 2015 में Volkswagen ने 3,23,700 वाहनों को रिकॉल किया था, जो कि भारत के एमिशन स्टैंडर्ड BS-IV की तुलना में लगभग 1.1 से 2.6 गुना तक एमिशन कर रहे थे। यह जानकारी ARAI द्वारा कुछ मॉडल्स पर किए गए टेस्ट से निकलकर सामने आई है। उस समय कंपनी ने यह बात स्वीकार की थी कि उसने 11 मिलियन डीजल वाहनों में गलत डिवाइस का इस्तेमाल किया था और इन वाहनों को यूएस, यूरोप के साथ कई ग्लोबल मार्केट में बेचा गया था।

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