नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। संसद से पारित होने के बाद संशोधित मोटर वाहन एक्ट, 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन इसके अमल में आने में अभी थोड़ा वक्त बाकी है। शुरू में केवल जुर्माने के प्रावधान लागू होंगे। बाकी प्रावधानों को उसके बाद लागू किया जाएगा। इसमें कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीने का वक्त लग सकता है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बावजूद संशोधित मोटर एक्ट तब तक लागू नहीं होगा, जब तक कि सड़क मंत्रालय इसे लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं कर देता। हालांकि यह अधिसूचना भी फिलहाल एक्ट के सारे प्रावधानों को लागू करने के बारे में न होकर केवल बढ़े जुर्माने संबंधी उपबंधों को लागू करने के बाबत होगी।

कानून मंत्रालय की सलाह से अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। अब इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे गजट में प्रकाशित होने के लिए भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में दो सप्ताह तक का वक्त लगने की संभावना है। अधिसूचना जारी होते ही पूरे देश में यातायात पुलिस को नियम उल्लंघन पर बढ़े हुए जुर्माने लगाने का अधिकार मिल जाएगा।

जहां तक एक्ट के अन्य प्रावधानों के कार्यान्वयन का प्रश्न है तो उनके बारे में बाद में समय-समय पर अलग से अधिसूचनाएं जारी की जाएंगी। इससे पहले उन प्रावधानों के बारे में विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर नियम निर्धारित किए जाएंगे। उदाहरण के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस तथा दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजे से संबंधित प्रावधानों को नियम निर्धारण के बाद अधिसूचना के जरिए लागू किया जाएगा। इसी प्रकार ओला और उबर जैसी टैक्सी एग्रीगेटर्स, त्रुटिपूर्ण वाहनों के रिकॉल तथा सड़क निर्माण में खामी की स्थिति में निर्माता कंपनी पर पेनाल्टी के प्रावधान भी नियम बनने के बाद लागू होंगे। इस वक्त लागू मोटर वाहन एक्ट वर्ष 1988 में बना था। तब भी इसके नियम बनाने और लागू करने में साल भर का समय लग गया था। और इसे 1989 के केंद्रीय मोटर नियम आने के बाद पूरी तरह अगल में लाया जा सका था। संशोधित मोटर वाहन एक्ट, 2019 को भी पूरी तरह लागू करने में तीन महीने से लेकर छह महीने तक का समय लग सकता है।

वैसे, यदि संशोधित मोटर एक्ट को उसकी वास्तविक भावना के साथ लागू किया गया तो इससे लोग यातायात नियमों के अनुपालन के लिए प्रेरित भी होंगे और बाध्य भी। जुर्मानों में कई गुना बढ़ोतरी लोगों को बाध्य करने के लिए की गई है। उदाहरण के लिए लाल-बत्ती जंप करते अथवा मोबाइल पर बात करते पकड़े जाने पर 1,000 रुपये तथा एंबुलेंस को रास्ता न देने पर 10 हजार रुपये की भारी पेनाल्टी का डर किसी को भी कानून के पालन के लिए विवश करेगा।

मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार जुर्मानों में भारी बढ़ोतरी इसलिए जरूरी हो गई थी क्योंकि मौजूदा जुर्माने की मौजूदा रकम यात्रियों को अपनी आदत बदलने को विवश नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि हादसों पर कोई कारगर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वर्ष 2017 में देश में कुल 4,64,910 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें सबसे ज्यादा 3,27,448 दुर्घटनाएं ज्यादा तेज गति से वाहन चलाने की वजह से हुईं। उस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कुल 1,47,913 लोग मारे गए। इनमें 98,613 मौतें निर्धारित गति से अधिक रफ्तार पर वाहन चलाने के कारण हुईं। वर्ष 2017 में हुए सड़क हादसों में 4,70,975 घायल भी हुए थे। इनमें भी ज्यादा रफ्तार के कारण घायल होने वालों की संख्या सर्वाधिक 3,43,083 थी।

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Posted By: Ankit Dubey

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