नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। Green hydrogen Future Fuel India: भारत सरकार ने इस साल फरवरी में ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी की शुरुआत की थी, जहां रिलायंस, लार्सन एंड टूर्बो और अदानी जैसी कंपनियों ने 6 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की थी। तो अब सवाल बनता है कि ग्रीन हाइड्रोजन का प्रोडक्शन भारत में कैसे होगा और इसका यहां भविष्य क्या है। इस टॉपिक पर आपकी समझ को बढ़ाने के लिए जागरण ने ग्रीन हाइड्रोजन के एक्सपर्ट अश्विनी कुमार से बात की। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन के भविष्य को लेकर अपने विचार रखे।

सवाल- भारत कैसे सबसे सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन की शुरुआत कर सकता है?

जवाब- भारत की ताकत दुनिया की सबसे सस्ती सोलर एनर्जी जेनरेट करने में है और इस क्षमता पर निर्भर भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का सबसे सस्ता ग्रीन हाइड्रोजन पैदा करने के लिए तैयार है। आज, भारत राष्ट्र की ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है, हालांकि, समय के साथ जब यह मांग लंबे समय तक पूरी होने लगती है, तो अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी का उपयोग हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। लागत कम रखने के लिए हमारा प्राथमिक ध्यान आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी रूप से तकनीकी क्षमताओं का निर्माण करने पर होना चाहिए।

सवाल- कैसे ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा ग्लोबल एनर्जी ट्रेड का भविष्य?

वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में कारोबार की जाने वाली सबसे बड़ी वस्तु तेल और गैस के रूप में ऊर्जा है। भविष्य में, हमें फिर से हाइड्रोजन के रूप में ऊर्जा, या अमोनिया आदि जैसे हाइड्रोजन ले जाने वाली वस्तुओं के अलावा तेल और गैस को बदलने की क्षमताओं के साथ एक भी वस्तु नहीं मिलती है। दुनिया भर में हर देश भौगोलिक रूप से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए उपयुक्त नहीं है, और कुछ देशों की ऊर्जा के सबसे स्वच्छ रूप का उत्पादन करने और बाकी देशों को इसकी आपूर्ति करने की क्षमता, यह सुनिश्चित करेगी कि ग्रीन हाइड्रोजन वैश्विक व्यापार का भविष्य बन जाए।

सवाल- यूरोपीय राष्ट्रों को ग्रीन हाइड्रोजन की तरफ शिफ्ट होने की क्यों है जरूरत?

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण ने यूरोपीय राष्ट्रों को झंझोड़ कर रख दिया है और सभी रूसी प्रतिबंधों के बावजूद, यूरोपीय संघ के सदस्य रूसी तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावी ढंग से मंजूरी नहीं दे पाए हैं। इस तरह की बाधा ने यूरोपीय संघ के देशों को अपने दीर्घकालिक ऊर्जा समाधानों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। लिथियम आधारित बैटरी आपूर्ति के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भरोसा करना या ग्रीन हाइड्रोजन में एक स्थायी आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा बनाने के मामले में अपनी ताकत विकसित करना ही एकमात्र समाधान है।

सवाल- भारत के परिवहन क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोन से चलने वाली मिराई का क्या है भविष्य?

मिराई का मतलब जापानी में भविष्य हो सकता है, लेकिन बाकी विकासशील दुनिया के लिए इसको अपनाना थोड़ा मुश्किल है। भारत जैसे देश में चंद करोड़पतियों को छोड़कर आम लोग इसको खरीद नहीं पाएंगे। इतनी महंगी गाड़ी का सफल होना काफी मुश्किल है।

Edited By: Atul Yadav