नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मौजूदा वक्त में हम एक वैश्विक महामारी के बुरे दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन इस दौर में भी सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत है। इस मुश्किल दौर में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई लोगों के मन में काफी सवाल उठ रहे हैं, जिसके चलते Jagran Hitech अपनी नई सीरीज #NayaBharat लेकर आया है, जहां हम इंडस्ट्री जगत के लोगों से जुड़ते हैं और उनसे नए भारत समेत तमाम तरह के मुद्दों पर बातचीत करते हैं। #NayaBharat के आज के एपिसोड में हमारे साथ जुड़े हैं Maruti Suzuki के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (मार्केटिंग एंड सेल्स), शशांक श्रीवास्तव, जिनसे Jagran Hitech के एडिटर सिद्धार्था शर्मा ने कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की है। तो आइए इस बातचीत को विस्तार से जानते हैं -

सिद्धार्था शर्मा - Covid-19 महामारी का भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर क्या अर पड़ा है?

शशांक श्रीवास्तव - इस साल अप्रैल माह में ऑटो सेल्स लगभग जीरो रही है। ऐसे में सेल्स प्वाइंट ऑफ व्यू को लेकर कंपनी काफी दबाव में रही है। महामारी से पहले मारुति सुजुकी की एक माह की सेल 1 लाख 30 हजार थी। आमतौर पर मार्च माह के आखिरी हफ्ते में अच्छी सेल्स देखने को मिलती है। वहीं, भारतीय कैलेंडर में नवंबर में नवरात्र के आसपास के वक्त को ऑटो सेल्स के हिसाब से सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। तब से लेकर मार्च तक डीलर्स के पास काफी स्टॉक रहता है। लेकिन अचानक हुए लॉकडाउन की वजह से हमारे डीलर्स को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। डीलर्स के सामने कैश फ्लो की सबसे बड़ी दिक्कत रही। इसके बावजूद मारूति सुजुकी बैलेंसशीट काफी मजबूत है। साथ ही यह डेब्ड फ्री कंपनी है। जैसा कि आपको मालूम है कि अप्रैल में जीरो सेल रही है। लेकिन यह भी पता होना चाहिए कि जीरो की भी अपनी एक ताकत होती है। कंपनी लॉकडाउन के इस दौर में भी सकरात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है। ऐसे में कंपनी को रुककर सोचने का मौका मिला कि लॉकडाउन के बाद कारोबार को कैसे आगे बढ़ाया जाए। इसका कंपनी को फायदा भी देखने को मिला, जैसे ही शोरूम खोला गया वैसे ही हमें बड़ी संख्या में सेल्स हासिल होने लगी।

सिद्धार्था शर्मा - लॉकडाउन के बाद क्या डिजिटलीकरण ही ऑटो सेक्टर में कारोबार का नया रास्ता बनेगा? मतलब क्या ऑनलाइन गाड़ियां खरीदने का दौर आने वाला है?

शशांक श्रीवास्तव - यह काफी अहम सवाल है। आगे का वक्त काफी डिजिटली होने वाला है, लेकिन मेरा मानना है कि कार खरीदने का कारोबार पूरी तरह से न डिजिटली होगा और न ऑफलाइन। व्हीकल खरीदने में कस्टमर 28 प्वाइंट से होकर गुजरता है, जैसे शोरूम विजिट करेगा, टेस्ट ड्राइव करेगा, लोन के लिए बैंक जाएगा। इसमें से 28 में से करीब 17 से 21 प्वाइंट डिजिटलाइज्ड हैं। बाकी प्वाइंट भी कोविड-19 के बाद तेजी से डिजिटली होंगे।

सिद्धार्था शर्मा - पीएम मोदी ने छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबार (MSME) के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया है। जैसे कि हमें मालूम है कि मारुति सुजुकी समेत पूरी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री MSME के साथ करोबार करती है। ऐसे में आप इस राहत पैकेज को लेकर क्या कहेंगे?

शशांक श्रीवास्तव - मारुति सुजुकी और उसके डीलर्स को इस दौर में सबसे ज्यादा दिक्कत कैश फ्लो को लेकर हुई है। यही चीज वेंडर के मामले में भी लागू होती है। लेकिन इसके बावजूद पीएम मोदी का छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज का ऐलान काफी सही कदम है। इस ऐलान के बाद लोग लोअर रेट पर कैश ले सकेंगे। यह लोन सरकार की तरफ से गारंटीड होगा। ऐसे लोन की ब्याज दर काफी कम होती है। ऐसे में मारूति को यकीन है कि लॉकडाउन के बाद कंपनी को बड़ी तादात में बिक्री हासिल होगी।

सिद्धार्था शर्मा - ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में मारुति सुजुकी सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली कंपनी है। ऐसे में मारुति सुजुकी लॉकडाउन के दौर में अपने कर्मचारियों की किस तरह मदद कर रही है? साथ ही इस दौरान अपने ग्राहक की तरफ से कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं?

शशांक श्रीवास्तव - कंपनी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर काफी सक्रिय हैं। कंपनी कर्मचारियों का न सिर्फ फिजिकली बल्कि मेंटली तौर पर ख्याल रख रही है। बाकी कंपनी सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग समेत बाकी कदम भी कर्मचारियो के लिए उठा रही है। इसके अलावा कंपनी ने मिंत्रा ऐप भी बनाया है, जहां कर्मचारियों को स्वस्थ रहने के अलावा कई फन लविंग चीजें उपलब्ध होंगी।

सिद्धार्था शर्मा - आपको क्या लगता है कि लॉकडाउन के बाद कार सेल्स में इजाफा देखने को मिलेगा?

शशांक श्रीवास्तव - कार की खरीदारी फूड और बाकी आइटम्स की खरीदारी से अलग हटकर होता है। कार खरीदारी कहीं हद तक ग्राहक के सेंटीमेंट पर भी निर्भर करती है। फंक्शन के लिहाज से कार खरीदी जरूर जाती है, लेकिन यह आस्पेक्ट काफी कम होता है। ऐसे में इस लॉकडाउन के दौर में ग्राहक के सेंटीमेंट का पॉजिटिव होना जरूरी है। कई ग्राहक फीडबैक देते हैं कि वो पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाए पर्सनल व्हीकल से ट्रैवल करना पसंद करते हैं। यह कार खरीदारी का सकरात्मक पहलू है। ऐसा कहा जा रहा है कि मार्केट में ट्रांसफर डिमांड आएगी। मतलब हाई डिमांड मिड पर आएगी। मिड डिमांड लोअर पर जाएगी और लोअर वाली डिमांड प्री-ओन्ड कार पर जाएगी। यह पूरा प्रोसेस मुझे काफी सकरात्मक लग रही है।

सिद्धार्था शर्मा - सरकार, ऑटो इंडस्ट्री और ग्राहकों और पाठकों के लिए आप क्या कहना चाहेंगे कि नए भारत में किस तरह से आगे बढ़ें?

शशांक श्रीवास्तव - सरकार की तरफ से सही कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन मेरा जनरल पब्लिक के लिए मैसेज है। मैं बताना चाहूंगा कि हमारे देश की जनसांख्यिकी काफी अच्छी है। मुझे लगता है आगे आने वाला टाइम यंग इंडिया के लिए काफी अच्छा रहेगा। हम दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनेंगे। ऐसे में हमें सकरात्मक रवैये के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मुझे यकीन है कि भारत हर बार की तरह इस बार भी मुश्किल दौर के बाद खुद को बेहतर साबित करेगा।

Posted By: Ankit Dubey

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